पेरू में दैनिक जीवन परिवारों के संबंधों, उम्र, काम, सामुदायिक जुड़ाव और स्थानीय परिवेश से प्रभावित होता है। बचपन, वयस्कता, माता-पिता होना और वृद्धावस्था क्षेत्र और परिवार के अनुसार अलग-अलग जिम्मेदारियों और सहयोग के रूपों से जुड़े हो सकते हैं। पेरू के इतिहास में प्राचीन समाज, इंका राज्य (Inca state), स्पेनी औपनिवेशिक शासन, स्वतंत्रता और आधुनिक गणराज्य शामिल हैं; ये परतें आज के स्थानों, पहचानों, सामाजिक संबंधों और रीति-रिवाजों को प्रभावित करती हैं। स्पेनी भाषा का व्यापक उपयोग होता है, जबकि क्वेचुआ भाषा (Quechua), आयमारा भाषा (Aymara) और अनेक अमेज़नियाई भाषाएँ सामुदायिक जीवन, पहचान, समारोहों, शिक्षा और सार्वजनिक संचार में महत्वपूर्ण बनी हुई हैं। धार्मिक जीवन में रोमन कैथोलिक (Roman Catholic) प्रथाएँ पूर्वजों, प्रकृति और समुदाय से जुड़ी एंडीज़ या अमेज़नियाई मान्यताओं के साथ मिल सकती हैं। कला में वस्त्र, मिट्टी के बर्तन, चित्रकला, नक्काशी, धातुकला, वास्तुकला, धार्मिक चित्र, लोककलाएँ और समकालीन रचनाएँ शामिल हैं; इनके रूप और अर्थ स्थान के अनुसार बदलते हैं। परंपराएँ भोजन, संगीत, नृत्य, पोशाक, आस्था, साझा स्मृति और स्थानीय समारोहों को जोड़ती हैं, और स्थिर रहने के बजाय बदलती रहती हैं। परिवार, पड़ोस, स्वदेशी समुदाय, संघ, विद्यालय, कार्यस्थल और स्थानीय सरकारें अलग-अलग तरीकों से सहयोग का आयोजन करती हैं। एक ही समारोह, भाषा, प्रतीक या कलात्मक रूप का अर्थ लीमा, किसी दूसरे तटीय शहर, एंडीज़ के किसी समुदाय या अमेज़न में अलग हो सकता है। इसलिए पेरू की संस्कृति को समझने के लिए क्षेत्र, भाषा, इतिहास, सामाजिक परिवेश और उन लोगों पर ध्यान देना आवश्यक है जो किसी प्रथा को अर्थ देते हैं।
संस्कृति पेरू में
पेरू में संस्कृति में परिवार का जीवन व्यवस्थित करने, बोलने, पूजा करने, कला रचने, परंपराएँ मनाने और साथ रहने के तरीके शामिल हैं। यह स्वदेशी सभ्यताओं और समुदायों, स्पेनी औपनिवेशिक इतिहास, अफ्रो-पेरूवियाई और आप्रवासी योगदानों तथा तट, एंडीज़ और अमेज़न के बीच जारी आदान-प्रदान को दर्शाती है। इसलिए पेरू में एक समान जीवन-पद्धति के बजाय अनेक क्षेत्रीय और सामाजिक संस्कृतियाँ हैं।
सुझाव
किसी कार्यक्रम की योजना बनाते समय, किसी समुदाय से संवाद करते समय या किसी प्रथा का अर्थ समझते समय पेरू की संस्कृति को क्षेत्र और परिस्थिति के अनुसार देखें। पूरे देश पर एक ही राष्ट्रीय ढाँचा लागू करने के बजाय संबंधित स्थान, भाषा, समुदाय, इतिहास और परिवेश की पहचान करें।

