पेरू की कला की जड़ें प्राचीन समाजों की दृश्य परंपराओं में बहुत गहरी हैं। मिट्टी के बर्तनों, वस्त्रों, धातु की वस्तुओं, वास्तुकला और नक्काशीदार वस्तुओं का उपयोग दैनिक जीवन, समारोह, प्रतिष्ठा, स्मृति और आदान-प्रदान के लिए किया जाता था। तटीय संस्कृतियों ने बारीक मिट्टी के बर्तन, भित्तिचित्र, धातु की वस्तुएँ और बड़ी बस्तियाँ विकसित कीं। एंडीज़ के समुदाय बुनाई, पत्थर के काम, वास्तुकला और जानवरों, भू-दृश्यों, पूर्वजों तथा सामाजिक पहचान से जुड़े डिज़ाइनों के लिए प्रसिद्ध हुए। इंका काल में विशाल पत्थर की वास्तुकला, सुव्यवस्थित बस्तियाँ, सड़क प्रणालियाँ और राजनीतिक तथा अनुष्ठानिक अर्थ वाले वस्त्र विकसित हुए। कई पुरानी तकनीकें और प्रतीक बाद के कालों में भी जारी रहे। औपनिवेशिक कला के साथ यूरोपीय ईसाई चित्र, चित्रकला की विधियाँ, चर्च की सजावट और मूर्तिकला के नए रूप आए। स्वदेशी और अफ्रीकी कलाकारों ने इन रूपों को अपनाकर ऐसी कला बनाई जिसमें स्थानीय ज्ञान और बाहर से आए विषय तथा सामग्री का मेल था। लोक कला में, जिसे अक्सर arte popular कहा जाता है, रेटाब्लो, मिट्टी के बर्तन, मुखौटे, नक्काशीदार वस्तुएँ, चित्रित फर्नीचर, गुड़िया और त्योहारों की सजावट शामिल हैं। इन कृतियों में धार्मिक दृश्य, पारिवारिक जीवन, स्थानीय इतिहास, हास्य या सामुदायिक आयोजन दिखाए जा सकते हैं। एंडीज़ के कई समुदायों में वस्त्र आज भी महत्वपूर्ण हैं। उनके रंग, पैटर्न, सामग्री और बुनाई की विधियाँ क्षेत्रीय जुड़ाव व्यक्त कर सकती हैं। किसी वस्त्र के अर्थ के बारे में पूछे बिना उसे पोशाक या सजावट मान लेना उचित नहीं है। आज पेरू के कलाकार चित्रकला, फ़ोटोग्राफ़ी, फ़िल्म, डिज़ाइन, इंस्टॉलेशन, संगीत, डिजिटल मीडिया और सार्वजनिक कला के माध्यम से काम करते हैं। उनकी कृतियों में प्रवासन, असमानता, स्मृति, पर्यावरण, जेंडर, स्वदेशी पहचान या शहर और ग्रामीण जीवन के बीच के अनुभव शामिल हो सकते हैं। संग्रहालय, कला दीर्घाएँ, कार्यशालाएँ, घर, चर्च, बाज़ार, स्कूल और त्योहार—सभी ऐसी जगहें हैं जहाँ कला से परिचय हो सकता है। कला, शिल्प, काम और अनुष्ठान के बीच की सीमा हमेशा वैसी नहीं होती जैसी यूरोपीय संग्रहालय व्यवस्था में होती है। कला आय और सांस्कृतिक निरंतरता को सहारा दे सकती है, लेकिन कलाकारों को कम कीमतों, नकल, खराब कामकाजी परिस्थितियों या बिना अनुमति उनके डिज़ाइनों के उपयोग का सामना करना पड़ सकता है। सम्मान का अर्थ है उचित भुगतान करना, कलाकार को श्रेय देना और समुदाय के नियमों पर ध्यान देना।
पेरू में कला
पेरू की कला में प्राचीन वस्तुएँ, स्वदेशी शिल्प, धार्मिक चित्र, लोक कलाएँ, आधुनिक कृतियाँ और शहरों तथा समुदायों में बनी नई कलाएँ शामिल हैं। वस्त्र, मिट्टी के बर्तन, चित्रकला, नक्काशी, धातुकला और वास्तुकला में अक्सर स्थान और पहचान से जुड़ी कहानियाँ होती हैं। पेरू की कला क्षेत्र के अनुसार विविध है, इसलिए कोई एक शैली पूरे देश का प्रतिनिधित्व नहीं कर सकती।
सुझाव
पेरू की कला को सुंदरता के साथ-साथ लोगों, स्थान और इतिहास के ज्ञान के रूप में भी देखें। किसी वस्तु को स्मृति-चिह्न मानने से पहले पूछें कि उसे किसने बनाया, उसका उपयोग कैसे होता है और क्या उसका सामुदायिक महत्व है।

