परिवार, बुज़ुर्ग, महिला और युवा समूह, सांस्कृतिक संगठन, सामुदायिक नेता और पारंपरिक प्राधिकरण सहभागिता, शिक्षा और मौखिक संवाद के माध्यम से रीति-रिवाज आगे पहुँचाते हैं। पारंपरिक प्राधिकरण मान्य सामुदायिक नेतृत्व है; प्रथागत कानून परिवार संबंधों, मध्यस्थता और स्थानीय जिम्मेदारियों जैसे क्षेत्रों में लागू सामुदायिक नियम हैं। ये प्रथाएँ अक्सर रिश्तेदारी, कुल पहचान, सामाजिक सहयोग और पारस्परिक सहायता से जुड़ी होती हैं। जीवन-चक्र की परंपराओं में परिवार और समुदाय के जमावड़े वाले नामकरण समारोह, दीक्षा संस्कार, विवाह वार्ता और अंत्येष्टि शामिल हैं। समुदायों के अनुसार प्रथाएँ बदलती हैं। NCDC पाठ्यक्रम कुछ दिन्का, नुएर और शिल्लुक संदर्भों में लड़कों के माथे पर निशान, दिन्का समुदायों में पहली माहवारी पर गीत-नृत्य वाला समारोह और कुछ ही समुदायों में खतना दर्ज करता है। इन उदाहरणों को सभी दक्षिण सूडानी समूहों की साझा प्रथा न समझें। विवाह में परिवारों या उनके प्रतिनिधियों के बीच बातचीत, प्रथागत प्रक्रियाएँ, धार्मिक पहलू या नागरिक पंजीकरण साथ हो सकते हैं। दुल्हन-मूल्य में मवेशी या नकद शामिल हो सकते हैं। पशुपालक समुदायों में बताए गए आँकड़े लगभग 10 से कई सौ मवेशियों तक हैं; यह समुदाय, परिवार की स्थिति, संपत्ति और व्यक्तिगत परिस्थितियों पर निर्भर है। दक्षिण सूडान में कोई एक राष्ट्रीय दर नहीं है। कुछ समुदायों में बहुपत्नी विवाह और विधवा-विवाह दर्ज हुए हैं। बाल विवाह, जबरन विवाह और अपहरण हानिकारक प्रथाएँ हैं, सामान्य परंपराएँ नहीं; संक्रमणकालीन संविधान विवाह के लिए दोनों पक्षों की स्वतंत्र और पूर्ण सहमति आवश्यक करता है। वह 18 वर्ष से कम बच्चों की रक्षा करता है और हानिकारक सांस्कृतिक प्रथाओं तथा अपहरण से सुरक्षा अपेक्षित करता है। मौसमी परंपराओं में फसल उत्सव, वर्षा अनुष्ठान और मवेशी या कृषि से जुड़े जमावड़े शामिल हैं। विवाह अक्सर फसल के बाद होते हैं, लेकिन समय स्थानीय परिस्थितियों, परिवार के निर्णयों और सामुदायिक प्रथाओं के अनुसार होता है, किसी बाध्यकारी राष्ट्रीय कैलेंडर के अनुसार नहीं। समारोह में साझा भोजन और पेय, गीत, नृत्य, मवेशी, बलि दिया गया बैल या परिवार और समुदाय का अन्य योगदान हो सकता है। निजी अनुष्ठानों में सामान्यतः परिवार या समुदाय की स्वीकृति से शामिल हुआ जाता है। सार्वजनिक उत्सवों में सांस्कृतिक समूह, राज्य प्राधिकरण या सामुदायिक नेता शामिल हो सकते हैं और वे सामाजिक एकजुटता तथा शांति निर्माण में मदद कर सकते हैं। पारंपरिक पोशाक में मनके का काम, आभूषण, सिर ढकने की वस्तुएँ और पंखों के मुकुट शामिल हो सकते हैं। रूप और अर्थ समूह तथा क्षेत्र पर निर्भर हैं। संगीत और मौखिक अभिव्यक्ति में गीत, प्रशंसा गीत, ढोल, तुरही, ज़ाइलोफ़ोन, नृत्य, कहानियाँ, कविता, नाटक, मिथक, किंवदंतियाँ, कहावतें, पहेलियाँ और लोकोक्तियाँ शामिल हैं। हस्तशिल्प में मनके का काम, टोकरी बुनना, मिट्टी के बर्तन, लकड़ी की नक्काशी, धातु का काम, कपड़ा, वस्त्र, औज़ार और वाद्ययंत्र शामिल हैं। कौशल मुख्यतः परिवारों और समुदायों में आगे दिए जाते हैं; स्कूल, तकनीकी और व्यावसायिक शिक्षा, उत्सव तथा कारीगर या सांस्कृतिक संगठन भी सहयोग देते हैं। क्षेत्रीय परंपराएँ विविध हैं। ग्रेटर इक्वेटोरिया में अज़ांदे, लोपित, मादी और आचोली जैसे समूह; ग्रेटर अपर नाइल में आन्युआक, माल्ले और शिल्लुक जैसे समूह; ग्रेटर बहर अल ग़ज़ल में लुओ जैसे समूह हैं। जुबा सांस्कृतिक सप्ताह जैसे आयोजन कई सांस्कृतिक समूहों को साथ लाए हैं; तोरित के कार्यक्रमों में क्षेत्रीय नृत्य, शिल्प और वाद्य प्रस्तुत हुए हैं। विस्थापन और शहरी जीवन सांस्कृतिक पहचान मिटाने के बजाय मिली-जुली और बदली प्रथाएँ बना सकते हैं। संस्कृति, संग्रहालय और राष्ट्रीय विरासत मंत्रालय, उसका संस्कृति और विरासत निदेशालय, राष्ट्रीय अमूर्त सांस्कृतिक विरासत समिति, संस्कृति के जिम्मेदार राज्य मंत्रालय, राष्ट्रीय पाठ्यक्रम विकास केंद्र, अभिलेखागार और संग्रहालय प्रलेखन, शिक्षा और संरक्षण में सहायता करते हैं। पारंपरिक प्राधिकरण के नेता और प्रथागत अदालतें स्थानीय परिवार और वैवाहिक मामलों, मध्यस्थता और शांति निर्माण से जुड़े कुछ काम भी करते हैं। प्रथागत अदालतें A, B और C श्रेणियों में संगठित हैं; A अदालतें मुख्यतः पारिवारिक और वैवाहिक मामले देखती हैं। उनका आपराधिक अधिकार सीमित है और व्यवहार औपचारिक कानूनी ढाँचे से अलग हो सकता है। दक्षिण सूडान का संक्रमणकालीन संविधान रीति-रिवाजों और परंपराओं को कानून का स्रोत मानता है, लेकिन उन्हें संवैधानिक और मानवाधिकार सुरक्षा के अधीन रखता है। संविधान स्वदेशी भाषाओं को राष्ट्रीय भाषा और अंग्रेज़ी को आधिकारिक कामकाजी भाषा मानता है; महिलाओं की गरिमा तथा संपत्ति और विरासत के अधिकारों की रक्षा करता है; कला, शिल्प और विरासत को समर्थन देता है। संघर्ष, विस्थापन, स्कूली शिक्षा, शहरीकरण, युवाओं की रुचियाँ, मीडिया और बाज़ार परंपराओं के हस्तांतरण को बदल रहे हैं। सांस्कृतिक उत्सव, सामुदायिक प्रलेखन, भाषा और संस्कृति सम्मेलन, स्कूल कार्यक्रम और रचनात्मक अर्थव्यवस्था का काम जीवंत परंपराओं को बनाए रखने में मदद कर सकता है और समुदायों को उन्हें बदलने की जगह देता है।
दक्षिण सूडान में परंपराएँ
दक्षिण सूडान में परंपराएँ परिवारों, कुलों, आयु-समूहों और समुदायों से हस्तांतरित जीवंत रीति-रिवाज, प्रतीक और अभिव्यक्तियाँ हैं। इनमें नामकरण और विवाह समारोह, अंत्येष्टि, फसल और वर्षा अनुष्ठान, संगीत, नृत्य, मौखिक कहानी-कथन, वस्त्र और हस्तशिल्प आते हैं। देश के लगभग 64 जातीय समूहों और अलग-अलग क्षेत्रों में प्रथाएँ बहुत बदलती हैं; कोई एक राष्ट्रीय परंपरा या वार्षिक कैलेंडर पूरे देश का प्रतिनिधित्व नहीं करता।
सुझाव
दक्षिण सूडान की किसी परंपरा को पूरे देश का प्रतिनिधि मानने के बजाय किसी विशिष्ट समुदाय, परिवार या क्षेत्र से जुड़ी मानें। किसी समारोह में शामिल होने, आयोजन करने या उसका दस्तावेज़ बनाने से पहले पूछें कि कौन भाग ले सकता है, अनुमति कौन देता है, क्या खर्च है और कौन-सी संवैधानिक सुरक्षा लागू होती है। स्वतंत्र सहमति, बाल संरक्षण और सामुदायिक नेताओं के साथ सम्मानपूर्ण सहयोग को प्राथमिकता दें।

