ऑस्ट्रेलिया में दीवानी कानून गैर-आपराधिक कानूनी विवादों के लिए एक व्यापक शब्द है। इसमें अनुबंध, लापरवाही और अन्य अपकृत्य, संपत्ति, कर्ज़, वसीयत और संपदा, समन्याय तथा अनेक वैधानिक अधिकार शामिल हैं। ऑस्ट्रेलिया की सामान्य कानून व्यवस्था कानूनों और अदालतों के फैसलों से आकार लेती है। कौन-सा कानून लागू होगा और सही मंच कौन-सा है, यह राज्य या क्षेत्र, पक्षकारों, घटनास्थल और संघीय मुद्दे की मौजूदगी पर निर्भर कर सकता है। दीवानी दावा करने के लिए आमतौर पर मान्यता प्राप्त कानूनी अधिकार, दूसरे पक्ष द्वारा कर्तव्य तोड़े जाने के तथ्य और उपयुक्त उपाय चाहिए। हर अनुचित घटना कानूनी दावा नहीं बनती, और व्यवहार में साक्ष्य निर्णायक हो सकता है। अनुबंध विवाद इस बारे में हो सकते हैं कि समझौता हुआ था या नहीं, उसकी शर्तों का क्या अर्थ है, कोई वादा तोड़ा गया या नहीं और उससे क्या नुकसान हुआ। समझौते लिखित, मौखिक या आचरण से निहित हो सकते हैं, हालाँकि लिखित साक्ष्य साबित करना आमतौर पर आसान होता है। लापरवाही का सामान्य अर्थ है कि कानूनी रूप से अपेक्षित सावधानी न बरती गई और उससे अनुमानित नुकसान हुआ। सटीक कसौटी तथ्यों और कानून पर निर्भर करती है, और जब कई लोगों ने नुकसान में योगदान दिया हो तो जिम्मेदारी घट या बँट सकती है। आम उपायों में मुआवज़ा, कर्ज़ की वसूली, घोषणाएँ, आचरण करने या रोकने के आदेश और विशिष्ट दायित्वों का प्रवर्तन शामिल हैं। दावेदार से आम तौर पर अपेक्षा होती है कि वह टाले जा सकने वाले नुकसान को सीमित करने के लिए उचित कदम उठाए। दीवानी मामलों का निपटारा बातचीत, मध्यस्थता, लोकपाल या उद्योग योजना, अधिकरण या अदालत के माध्यम से हो सकता है। सबसे अच्छा रास्ता विवाद के प्रकार और मूल्य, वांछित उपाय, लागत, तात्कालिकता तथा पक्षों के संबंध पर निर्भर करता है। समय-सीमाएँ किसी अन्यथा वैध दावे को आगे बढ़ने से रोक सकती हैं। औपचारिक कार्रवाई शुरू करने से पहले दस्तावेज़ों, गवाहों की जानकारी, विशेषज्ञ साक्ष्य, कानूनी लागत और दूसरे पक्ष की आदेश का पालन करने की क्षमता पर विचार करें।
ऑस्ट्रेलिया में दीवानी कानून
ऑस्ट्रेलिया का दीवानी कानून अधिकारों, कर्तव्यों, धन, संपत्ति, अनुबंधों और नुकसान से जुड़े निजी विवादों को संभालता है। यह आपराधिक कानून से अलग है, क्योंकि इसका सामान्य उद्देश्य अपराध के लिए दंड देना नहीं, बल्कि विवाद सुलझाना या उपाय देना होता है। विषय के अनुसार राज्य, क्षेत्र और संघीय कानून प्रासंगिक हो सकते हैं।
सुझाव
विवाद को एक वाक्य में परिभाषित करें, साक्ष्य सुरक्षित रखें और तय करें कि आपको वास्तव में कौन-सा नतीजा चाहिए। जहाँ सुरक्षित और उपयुक्त हो, अदालत से पहले बातचीत या विवाद समाधान का आनुपातिक तरीका आज़माएँ। समय-सीमा, बड़े नुकसान, संपत्ति के अधिकार, निषेधाज्ञा या जटिल अनुबंध का मामला हो तो जल्दी कानूनी सलाह लें।

