अहुआक्रो और तियासाले के पुरातात्त्विक साक्ष्यों में महापाषाण, पीसने के स्थान, औजारों के निशान और नवपाषाणकालीन अवशेष शामिल हैं, हालांकि पहुँच और स्थानीय संरक्षण नियम अलग-अलग हैं। उत्तरी क्षेत्रों में मांडे और गुर संबंधों, माली और सोंघाई के प्रभावों, सहारा-पार व्यापार, इस्लामीकरण और प्रवास ने मध्यकालीन इतिहास को आकार दिया। चौदहवीं से उन्नीसवीं शताब्दी के बीच तेंग्रेला, कूटो, कोंग और सामातिगुइला जैसे स्थानों की सूडानी शैली की मस्जिदें स्थानीय मिट्टी और लकड़ी की तकनीकों तथा मांडे और इस्लामी प्रभावों के मेल से विकसित हुईं; यूनेस्को ने 2021 में इनमें से आठ मस्जिदों को मान्यता दी और वे आज भी धार्मिक, शिक्षण तथा सामुदायिक स्थल हैं। यूरोपीय तटीय संपर्क लगभग 1470–1471 में शुरू हुए, जिनमें पहले पुर्तगाल शामिल था; बाद में हाथीदांत के व्यापार, दास बनाए जाने, युद्ध, ऋण-बन्धन और वंशानुगत दासता के इतिहास को एक सरलीकृत विवरण में समेटने के बजाय अलग-अलग समझना चाहिए। फ्रांस ने 1843 में संरक्षित राज्य स्थापित किया और 10 मार्च 1893 के आदेश से स्वायत्त उपनिवेश बनाया। ग्रांड-बासाम 1893 से 1900 तक पहली औपनिवेशिक राजधानी रहा, फिर फ्रांसीसी पश्चिम अफ्रीका के प्रशासनिक केंद्रों के रूप में बिंगरविल और आबिदजान आए। औपनिवेशिक शासन ने सीमाओं, श्रम प्रणालियों, बागानों, रबर और कोको उत्पादन, मिशनों, शिक्षा, स्थानीय प्रतिरोध और सहयोग को बदल दिया। 1945 और 1946 में राजनीतिक संगठन का विस्तार हुआ, जबरन श्रम और Code de l’indigénat समाप्त किए गए और 7 अगस्त 1960 को फेलिक्स उफ़ूए-ब्वान्यी के नेतृत्व में कोट डी आइवर संप्रभु हुआ; वे 1993 तक राष्ट्रपति रहे। 1990 में बहुदलीय व्यवस्था की वापसी तक PDCI-RDA राजनीति पर हावी रहा; इस दौरान कोको और कॉफी, निवेश, प्रवास और शहरीकरण ने तथाकथित ivoirien चमत्कार को बढ़ावा दिया और साथ ही भूमि, नागरिकता तथा Ivoirité को लेकर विवाद तेज किए। 7 दिसंबर 1993 को उफ़ूए-ब्वान्यी की मृत्यु के बाद दिसंबर 1999 में रॉबर्ट गुएई के नेतृत्व में सैन्य तख्तापलट हुआ; इसके बाद 2002 से विद्रोह और क्षेत्रीय विभाजन, 2007 का औआगादूगू समझौता, 2010 का विवादित राष्ट्रपति चुनाव और 2010–2011 की चुनावोत्तर हिंसा हुई। 2012 में यूनेस्को विश्व विरासत सूची में शामिल ग्रांड-बासाम का ऐतिहासिक नगर औपनिवेशिक नियोजन, व्यापार, प्रशासन, आवासीय क्षेत्रों, न्ज़िमा गांव और स्वतंत्रता आंदोलन का दस्तावेज़ है। कोट डी आइवर में शोध के लिए राष्ट्रीय अभिलेखागार, संग्रहालय, विश्वविद्यालय—जैसे Université Félix Houphouët-Boigny—विरासत संस्थान, पुरातत्त्व, पुस्तकालय, मौखिक इतिहास और यूनेस्को, संयुक्त राष्ट्र तथा ICC के अंतरराष्ट्रीय रिकॉर्ड उपयोगी हैं। औपनिवेशिक अभिलेख प्रशासनिक हित दर्शाते हैं; उनकी तुलना स्थानीय मौखिक इतिहास, भाषाई साक्ष्य, सामुदायिक स्मृतियों, पुरातात्त्विक निष्कर्षों और कानूनी रिकॉर्ड से करनी चाहिए। अभिलेखागार और संग्रहालय तक पहुँच, शुल्क, खुलने का समय और अनुमति संस्था तथा संग्रह के अनुसार अलग होते हैं। मौखिक इतिहास और क्षेत्रीय शोध में सहमति लेना, स्रोतों की पहचान सुरक्षित रखना और सामुदायिक संवेदनशीलताओं का सम्मान करना आवश्यक है; ऐतिहासिक सामग्री के उपयोग पर स्रोत-उत्पत्ति, निजता, कॉपीराइट और संभावित प्रत्यावर्तन दावे भी असर डालते हैं।
कोट डी आइवर में इतिहास
कोट डी आइवर का इतिहास पुरातात्त्विक साक्ष्यों से लेकर वर्तमान तक बदलते समाजों, संस्थाओं, अर्थव्यवस्थाओं और राजनीतिक संघर्षों का इतिहास है। इसमें औपनिवेशिक काल से पहले का व्यापार और प्रवास, फ्रांसीसी शासन, 1960 की स्वतंत्रता, कोको अर्थव्यवस्था और 1999 से 2011 के संकट शामिल हैं। लिखित अभिलेख, पुरातत्त्व, मौखिक इतिहास, विरासत स्थल तथा अदालतों या संयुक्त राष्ट्र के रिकॉर्ड अलग-अलग साक्ष्य और कभी-कभी परस्पर विरोधी व्याख्याएँ देते हैं।
सुझाव
कोट डी आइवर के इतिहास को एक ही, पूरी तरह दर्ज कथा न मानें। काल और क्षेत्र के अनुरूप स्रोत चुनें और औपनिवेशिक रिकॉर्ड की तुलना पुरातत्त्व, मौखिक इतिहास, स्थानीय स्मृतियों तथा अदालतों, संयुक्त राष्ट्र या ICC के दस्तावेज़ों से करें।

