पुरातात्त्विक साक्ष्य बताते हैं कि कोरियाई प्रायद्वीप के उत्तरी भाग में पुरापाषाण और नवपाषाण काल में बसावट थी। आरंभिक इतिहास में गोजोसॉन और लेलांग कमांडरी शामिल हैं; इनके इतिहास का पुनर्निर्माण पुरातत्त्व, अभिलेखों, चीनी इतिहास-वृत्तांतों और बाद की कोरियाई परंपराओं के आधार पर किया जाता है। कुछ तिथियों और व्याख्याओं पर मतभेद हैं। गोगुर्यो, जिसे कोगुर्यो भी कहा जाता है, 277 ईसा पूर्व से 668 ईस्वी तक अस्तित्व में था और उसने 427 में प्योंगयांग को राजधानी बनाया। बल्हे की स्थापना 698 में हुई। प्योंगयांग के पास स्थित कोगुर्यो मकबरा परिसर में व्यापक पुरातात्त्विक अभिलेखों के अनुसार लगभग 80 चित्रित कब्रें हैं; यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल में 63 मकबरे हैं, जिनमें 16 पर भित्तिचित्र हैं। गोर्यो, जिसे कोर्यो भी कहा जाता है, ने 918 से 1392 तक शासन किया और काएसोंग को अपनी राजधानी बनाया। उसके इतिहास में बौद्ध संस्थाएँ, बाद में नव-कन्फ्यूशियसी राजनीतिक संस्कृति की ओर झुकाव और 1231 से 1259 तक मंगोल आक्रमण शामिल हैं। उसके बाद जोसॉन, जिसे चोसॉन भी कहा जाता है, ने 1392 से 1910 तक शासन किया। इम्जिन और मंचू आक्रमण, जोसॉन के अंतिम दौर में विदेशों के लिए खुलना और सुधारों को लेकर संघर्ष, तथा 1897 से 1910 तक कोरियाई साम्राज्य ने आधुनिक इतिहास की ओर संक्रमण को आकार दिया। काएसोंग के ऐतिहासिक स्मारक और स्थल गोर्यो काल के साक्ष्य सुरक्षित रखते हैं, जबकि कोगुर्यो के मकबरे प्राचीन काल के साक्ष्य संजोते हैं। जापान ने 1910 से 1945 तक कोरिया पर शासन किया। प्रायद्वीप के उत्तरी भाग में जापानी अधिकारियों ने कच्चे माल के निष्कर्षण और भारी उद्योग पर ध्यान केंद्रित किया। औपनिवेशिक शासन के दौरान स्वतंत्रता आंदोलन सक्रिय रहे; 1945 में मुक्ति के बाद प्रायद्वीप का 38वीं समानांतर रेखा के साथ विभाजन हुआ। सोवियत संघ ने उत्तरी क्षेत्र का प्रशासन किया और संयुक्त राज्य ने दक्षिणी क्षेत्र का। मॉस्को निर्णय में एक अंतरिम कोरियाई सरकार और अमेरिका-सोवियत संयुक्त आयोग का प्रस्ताव था, लेकिन सहयोग सफल नहीं हुआ। कोरिया गणराज्य की स्थापना 15 अगस्त 1948 को और लोकतांत्रिक जनवादी गणराज्य कोरिया की, जिसे आम तौर पर डीपीआरके कहा जाता है, स्थापना 9 सितंबर 1948 को हुई। दोनों सरकारों ने पूरे देश की वैध सरकार होने का दावा किया। उत्तर कोरियाई बलों ने 25 जून 1950 को हमला किया, जिससे कोरियाई युद्ध शुरू हुआ। संयुक्त राष्ट्र की अनुमति से एक सैन्य बल ने हस्तक्षेप किया और 1950 के अंत में चीनी बल युद्ध में शामिल हुए। कोरियाई युद्धविराम समझौते पर 27 जुलाई 1953 को पानमुनजॉम में हस्ताक्षर हुए। इससे युद्धविराम व्यवस्था और असैन्यीकृत क्षेत्र बना, लेकिन इसके बाद शांति संधि नहीं हुई। युद्ध के बाद की सरकारों ने उद्योग का पुनर्निर्माण किया और राजनीतिक सत्ता को मजबूत किया। किम इल-सुंग ने अपना नेतृत्व सुदृढ़ किया और जूचे आधिकारिक वृत्तांत में एक केंद्रीय ऐतिहासिक तथा राजनीतिक अवधारणा बना। युद्ध की शुरुआत, विदेशी समर्थन, मुक्ति और कब्ज़े, तथा प्रतिस्पर्धी कोरियाई सरकारों की वैधता को लेकर ऐतिहासिक विवरणों में मतभेद हैं। इसलिए उत्तर कोरियाई सरकारी प्रकाशनों की तुलना दक्षिण कोरियाई, संयुक्त राष्ट्र, संयुक्त राज्य, चीनी और सोवियत अभिलेखों, पुरातात्त्विक साक्ष्यों, अभिलेखों, यूनेस्को दस्तावेज़ों और कूटनीतिक रिकॉर्ड से करनी चाहिए। उत्तर कोरिया के अभिलेखागार तक स्वतंत्र पहुँच आम तौर पर उपलब्ध नहीं है; विरासत स्थलों पर क्षेत्रीय शोध या यात्राएँ राज्य-नियंत्रित अनुमति और परियोजना की शर्तों पर निर्भर करती हैं। 1990 के दशक में सोवियत गुट के कई संबंध समाप्त हुए, गंभीर आर्थिक और आपूर्ति संकट आया, 1995 से 1997 तक बाढ़ आई और एफएओ तथा डब्ल्यूएफपी सहित संगठनों ने अंतरराष्ट्रीय खाद्य सहायता दी। उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया 1991 में संयुक्त राष्ट्र में शामिल हुए। अंतर-कोरियाई संवाद, सहायता और परमाणु कूटनीति ने आगे के समकालीन इतिहास को आकार दिया; बाद में किम जोंग-उन का नेतृत्व आया। उत्तर कोरिया में ऐतिहासिक अनुसंधान और विरासत प्रबंधन में पुरातात्त्विक खुदाई, सरकारी सूचियाँ, संरक्षण और यूनेस्को के साथ सहयोग शामिल हैं। सांस्कृतिक संपत्ति संरक्षण के राष्ट्रीय ब्यूरो, कोरियाई सांस्कृतिक संरक्षण केंद्र और स्थानीय प्रबंधन निकाय ऐसे ढाँचे में काम करते हैं जिसमें 1994 का सांस्कृतिक संपत्ति कानून, 2009 के नियम और यूनेस्को विश्व धरोहर अभिसमय शामिल हैं; उत्तर कोरिया ने इस अभिसमय की 1998 में पुष्टि की थी।
उत्तर कोरिया में इतिहास
उत्तर कोरिया का इतिहास कोरियाई प्रायद्वीप के उत्तरी भाग में प्रागैतिहासिक बसावट से लेकर वर्तमान तक फैला है। इसमें गोजोसॉन और गोगुर्यो जैसे प्राचीन राज्य, गोर्यो और जोसॉन काल, जापानी औपनिवेशिक शासन, 1945 के बाद कोरिया का विभाजन और कोरियाई युद्ध शामिल हैं। 1953 के युद्धविराम ने सक्रिय लड़ाई रोक दी, लेकिन शांति संधि नहीं हुई; इसलिए विभाजन और असैन्यीकृत क्षेत्र उत्तर कोरिया के इतिहास की लगातार बनी रहने वाली विशेषताएँ हैं।
सुझाव
उत्तर कोरिया के इतिहास को एक ही तय वृत्तांत के बजाय स्रोतों की आलोचनात्मक जाँच वाली समयरेखा के रूप में देखें। सामान्य परिचय के लिए घटनाओं को कालक्रम में रखें; कोरिया के विभाजन, कोरियाई युद्ध या राजनीतिक वैधता के लिए स्रोतों के उद्गम की तुलना करें और मतभेद दर्ज करें। खासकर जहाँ अभिलेखागार तक पहुँच और क्षेत्रीय शोध सीमित हैं, वहाँ साक्ष्य और व्याख्या को अलग रखें।

