श्रीलंका एक उष्णकटिबंधीय द्वीप है, जहाँ छोटे से क्षेत्र में प्रकृति की असाधारण विविधता है। गर्म मैदानी इलाके, ठंडे पर्वत, वर्षावन, शुष्क वन, घास के मैदान, नदियाँ, लैगून, समुद्रतट और तट से दूर के जलक्षेत्र अनेक जीवों को सहारा देते हैं। दो मानसून प्रणालियाँ इस प्राकृतिक स्वरूप को गहराई से प्रभावित करती हैं। दक्षिण-पश्चिम में आम तौर पर अधिक वर्षा होती है, जबकि उत्तर, पूर्व और दक्षिण-पूर्व के बड़े हिस्सों में शुष्क मौसम स्पष्ट होता है; स्थानीय परिस्थितियाँ ऊँचाई और भूभाग के अनुसार भी बदलती हैं। आर्द्र क्षेत्र में घने सदाबहार वन हैं और अनेक प्रजातियाँ ऐसी हैं जो कहीं और नहीं मिलतीं। मध्यवर्ती पहाड़ी इलाके में बादल वन और पर्वतीय घास के मैदान हैं, जहाँ ठंडा तापमान मैदानी क्षेत्रों से अलग आवास बनाता है। शुष्क क्षेत्र के परिदृश्य में मानसूनी वन, झाड़ियाँ, मौसमी जलाशय और खुले इलाके शामिल हैं। परंपरागत जलाशय, जिन्हें आम तौर पर टैंक या वेवा (wewa) कहा जाता है, पानी जमा करके लोगों और खेती की मदद करते हैं और पक्षियों, मछलियों, सरीसृपों तथा स्तनधारियों को आवास भी दे सकते हैं। श्रीलंका हाथियों, तेंदुओं, स्लॉथ भालुओं, हिरणों, बंदरों, मगरमच्छों, समुद्री कछुओं और कई स्थानीय तथा प्रवासी पक्षियों के लिए जाना जाता है। जंगली जानवर पालतू नहीं होते। परिचित प्रजातियाँ भी पास जाने, उन्हें घेरने या खाना खिलाने पर ख़तरनाक हो सकती हैं। तटीय प्रकृति में मैंग्रोव, लवणीय दलदल, लैगून, रेत के टीले, समुद्री घास के क्षेत्र, प्रवाल भित्तियाँ और खुला समुद्र शामिल हैं। ये पारिस्थितिक तंत्र छोटे समुद्री जीवों को आश्रय देते हैं, लहरों से होने वाले नुकसान को घटाते हैं, मछुआरा समुदायों का सहारा बनते हैं और प्रदूषण या लापरवाह पर्यटन से प्रभावित हो सकते हैं। संरक्षित क्षेत्रों में राष्ट्रीय उद्यान, प्रकृति आरक्षित क्षेत्र, वन आरक्षित क्षेत्र और समुद्री संरक्षण क्षेत्र शामिल हैं। नियम और प्रवेश की शर्तें अलग-अलग होती हैं, लेकिन आम तौर पर आगंतुकों को सीमाओं का सम्मान करना, अधिकृत रास्तों पर चलना और वन्यजीव तथा वन अधिकारियों के निर्देश मानना चाहिए। प्रकृति पानी की आपूर्ति, उपजाऊ मिट्टी, भोजन, आजीविका, तापमान में राहत, बाढ़ नियंत्रण, पर्यटन और सांस्कृतिक परंपराओं का आधार है। उस पर मुख्य दबावों में आवास का नष्ट होना, कचरा, आग, बाहरी आक्रामक प्रजातियाँ, वन्यजीवों से जुड़ी गैरकानूनी गतिविधियाँ और उन जगहों पर संघर्ष शामिल हैं जहाँ लोगों की ज़मीन जानवरों के रास्तों से मिलती है। रक्षा के प्रयास तब सबसे सफल होते हैं जब निवासी, किसान, मछुआरे, आगंतुक, वैज्ञानिक और सार्वजनिक प्राधिकरण मिलकर काम करते हैं। जिम्मेदार यात्रा, कचरे का सावधानी से निपटान, स्थानीय देशज पौधे लगाना और वन्यजीवों के प्रति सम्मानजनक व्यवहार उपयोगी शुरुआती योगदान हैं।
श्रीलंका की प्रकृति
श्रीलंका की समृद्ध प्रकृति पर उष्णकटिबंधीय जलवायु, मध्यवर्ती पर्वत, मानसूनी वर्षा, नदियाँ, जंगल, आर्द्रभूमियाँ और आसपास का हिंद महासागर प्रभाव डालते हैं। यहाँ के जीव-जंतु और पौधे नम दक्षिण-पश्चिम, अपेक्षाकृत शुष्क उत्तर और पूर्व, ऊँचे पर्वतीय क्षेत्र तथा तट के बीच बहुत अलग हैं। इन जुड़े हुए आवासों को समझने से लोग उनका आनंद सुरक्षित ढंग से ले सकते हैं और उनकी रक्षा कर सकते हैं।
सुझाव
श्रीलंका की प्रकृति को आकर्षणों के संग्रह के बजाय एक जीवित तंत्र मानें। स्थानीय आवास, मौसम और जलवायु को ध्यान में रखकर योजना बनाएँ, वन्यजीवों से सुरक्षित दूरी रखें और हर जगह को यथासंभव साफ़ तथा अछूता छोड़ें। जंगलों, जलाशयों, आर्द्रभूमियों और समुद्रतटों के पास छोटे फैसले भी खास तौर पर मायने रखते हैं।

