वानुआतु के द्वीपों पर कम-से-कम लगभग 3,000 वर्ष पहले लोग बस गए थे। कुछ सरकारी विवरण लगभग 2000 BCE के पुरातात्विक प्रमाणों को सबसे पुराना बताते हैं, लेकिन तारीखें द्वीप और पुरातात्विक पद्धति के अनुसार बदलती हैं। एफाते के तेओउमा स्थल पर लगभग 3,100 वर्ष पुरानी प्रारंभिक लापिता बस्ती और कब्रिस्तान हैं। लापिता मिट्टी-बर्तन परंपराएँ आगे चलकर स्थानीय क्रमों में विकसित हुईं। सबसे शुरुआती काल के लिए पुरातत्व और मौखिक परंपराएँ केंद्रीय हैं, क्योंकि लिखित अभिलेख मौजूद नहीं हैं। ये एक-दूसरे का समर्थन कर सकते हैं, पर ये एक ही प्रकार के प्रमाण नहीं हैं। द्वीपों और क्षेत्रों का इतिहास अलग-अलग है। मध्य वानुआतु में, लगभग 1,500 वर्ष पहले एफाते पर मिट्टी-बर्तन बनाने की परंपरा बदली, संभवतः व्यापार और स्थानीय उत्पादन के तौर-तरीकों से जुड़कर। मुखिया पदवियों की प्रणालियाँ लगभग 1,200 से 1,000 वर्ष पहले विकसित हुईं। 1452 में कुए ज्वालामुखी-विस्फोट से क्षेत्र में बड़ा व्यवधान आया। ग्रेट एफाते युद्ध लगभग 1600 में समाप्त हुआ। रोई माता से जुड़ा इतिहास नफलाक मातृवंशीय कुलों, संघर्ष-मध्यस्थता, भूमि और पदवी-अधिकार तथा प्रथागत अधिकार के बारे में मौखिक परंपराओं को एफाते, लेलेपा और आर्टोक के पुरातात्विक स्थलों से जोड़ता है। निवास, मृत्यु और सामूहिक दफन के स्थल इस प्रमाण का हिस्सा हैं। यूनेस्को चीफ रोई माता के डोमेन को मान्यता देता है, लेकिन वहाँ पहुँच और व्याख्या में समुदाय के संरक्षकों की भूमिका केंद्रीय रहती है। पेद्रो फर्नांदेस दे क्विरोश 1605 में द्वीपों तक पहुँचे। 1774 में जेम्स कुक की यात्रा से यूरोपीय नाम न्यू हेब्रिडीज़ प्रचलित हुआ। अठारहवीं शताब्दी के उत्तरार्ध में यूरोपीय बसावट बढ़ी। पहले मिशनरी 1839 में एर्रोमांगो पहुँचे। उन्नीसवीं शताब्दी में मिशनरी गतिविधियों, व्यापार, बागानों और श्रमिक भर्ती—जिसमें ब्लैकबर्डिंग भी शामिल थी—का द्वीपों और समुदायों पर अलग-अलग प्रभाव पड़ा। एंग्लो-फ्रांसीसी नौसैनिक आयोग 1887 में शुरू हुआ। ब्रिटेन और फ्रांस ने 1906 में एंग्लो-फ्रांसीसी कंडोमिनियम पर सहमति की। 1914 के प्रोटोकॉल ने इसका विस्तृत ढाँचा 1922 में लागू किया। इस व्यवस्था में अलग-अलग ब्रिटिश और फ्रांसीसी प्रशासन के साथ संयुक्त संस्थाएँ, जिनमें संयुक्त न्यायालय भी शामिल था, मौजूद थीं। यह व्यवस्था ni-Vanuatu के प्रथागत कानून और kastom—स्थानीय शब्द, जिसका अर्थ प्रथागत व्यवहार, ज्ञान और अधिकार है—के साथ-साथ चलती थी। कुछ ni-Vanuatu इस जटिल और विभाजित प्रशासन के कारण इसे “Pandemonium” कहते थे। भूमि-स्वामित्व और राजनीतिक शक्ति पर इस औपनिवेशिक ढाँचे का गहरा प्रभाव बना रहा। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान 1942 से 1945 तक एफाते और एस्पिरिटु सैंटो पर मित्र राष्ट्रों के सैन्य अड्डे संचालित हुए। इन अड्डों ने बुनियादी ढाँचे, श्रम के तौर-तरीकों और स्थानीय स्मृतियों को बदला। उनका प्रभाव द्वीपों और समुदायों के बीच अलग-अलग था। 1960 के दशक में उपनिवेश-मुक्ति तेज हुई। 1957 की सलाहकार परिषद ने ni-Vanuatu को प्रतिनिधित्व दिया, लेकिन अधिकार सीमित थे। 1975 में पोर्ट विला और लुगनविल में नगरपालिका चुनाव और प्रतिनिधि सभा की स्थापना हुई। वानुआ’आकु पाटी ने 1977 में एक अंतरिम सरकार बनाई। 1978 में आंतरिक स्वशासन शुरू हुआ और 1979 में संविधान पर काम हुआ। 30 जुलाई 1980 को न्यू हेब्रिडीज़ वानुआतु गणराज्य बना। वानुआतु 1981 में संयुक्त राष्ट्र और 1983 में गुटनिरपेक्ष आंदोलन में शामिल हुआ। स्वतंत्रता को एक से अधिक दृष्टिकोणों से याद किया जाता है। मुख्य राष्ट्रीय आख्यान प्रबल रूप से उपनिवेश-विरोधी है और वानुआ’आकु पाटी से जुड़ा है। फ्रांकोफोन और UMP दृष्टिकोण, नाग्रिअमेल और सैंटो के इतिहास तथा स्थानीय kastom विवरण अलग व्याख्याएँ जोड़ते हैं। स्वतंत्रता के बाद नाग्रिअमेल विद्रोह राजनीतिक टूटन की एक महत्वपूर्ण स्थानीय स्मृति बना हुआ है। 1980 के बाद से ऐतिहासिक निरंतरता में तीन औपनिवेशिक प्रणालियों का एकीकरण, प्रथागत कानून की भूमिका, भूमि-अधिकार, राष्ट्रीय एकता और केंद्रीय संस्थाओं व द्वीप समुदायों के बीच संबंध शामिल रहे हैं। 1994 से वानुआतु में छह प्रांत हैं। ऐतिहासिक शोध और विरासत संरक्षण में वानुआतु राष्ट्रीय सांस्कृतिक परिषद, वानुआतु कल्जोरल सेंटा और राष्ट्रीय संग्रहालय, वानुआतु राष्ट्रीय विरासत रजिस्ट्री, राष्ट्रीय पुस्तकालय और अभिलेखागार, संसद और Hansard, यूनेस्को तथा स्थानीय मुखिया, परिवार, वंश-समूह, समुदाय और प्रथागत अधिकारधारक शामिल हैं। वानुआतु राष्ट्रीय विरासत रजिस्ट्री स्थलों का रिकॉर्ड रखती है, लेकिन उसका सर्वेक्षण अधूरा है; वानुआतु कल्जोरल सेंटा ने बताया है कि आधे से भी कम स्थलों का सर्वेक्षण हुआ है। शोधकर्ताओं को राष्ट्रीय सांस्कृतिक परिषद के माध्यम से अनुमति लेनी पड़ सकती है। Tabu, अर्थात प्रथागत प्रतिबंध, और पारंपरिक कॉपीराइट विशेष ज्ञान तक पहुँच सीमित कर सकते हैं। शोधकर्ताओं से kastom का सम्मान करने, स्रोत-प्रामाणिकता स्थापित करने और प्रकाशन, फील्ड नोट, ऑडियो, फिल्म तथा तस्वीरें जमा करने की अपेक्षा की जाती है। कलाकृतियों के निर्यात के लिए कानूनन आवश्यक अनुमति चाहिए। अभिलेखागार सामान्यतः सार्वजनिक हैं, लेकिन पहुँच सांस्कृतिक संरक्षण और सामग्री की स्थिति पर निर्भर कर सकती है। स्थलों और कलाकृतियों की सुरक्षा के लिए Preservation of Sites and Artefacts Act, जिसे Cap 39 के नाम से जाना जाता है, प्रासंगिक है। शोध लागत के लिए एक समान राष्ट्रीय दर-सूची प्रकाशित नहीं है और अभिलेखागार तक पहुँच का निर्णय प्रत्येक मामले में किया जाता है। 2015 में चक्रवात पाम और 2024 के भूकंपों से सांस्कृतिक संस्थानों, अभिलेखागार और विरासत स्थलों को नुकसान पहुँचा। बहाली में कई वर्ष लग सकते हैं। इसलिए संरक्षण का संबंध केवल वस्तुओं और इमारतों से नहीं, बल्कि जीवित स्मृति, सामुदायिक लचीलेपन, स्वामित्व और संरक्षकों के अधिकारों से भी है।
वानुआतु में इतिहास
वानुआतु का इतिहास कम-से-कम 3,000 वर्षों तक फैला है—प्रारंभिक बसावट और लापिता समुदायों से लेकर आज के वानुआतु गणराज्य तक। सबसे शुरुआती काल के लिखित स्रोत उपलब्ध नहीं हैं, इसलिए पुरातत्व और मौखिक परंपराएँ मुख्य प्रमाण हैं। यूरोपीय संपर्क, मिशनरी गतिविधियाँ, श्रमिकों की भर्ती, एंग्लो-फ्रांसीसी कंडोमिनियम और द्वितीय विश्व युद्ध ने द्वीपों को अलग-अलग ढंग से बदल दिया। वानुआतु 30 जुलाई 1980 को स्वतंत्र हुआ, जबकि औपनिवेशिक संस्थाएँ, प्रथागत कानून और इतिहास की प्रतिस्पर्धी स्मृतियाँ सार्वजनिक जीवन को प्रभावित करती रहीं।
सुझाव
वानुआतु के इतिहास को एक समान राष्ट्रीय कहानी के बजाय स्थान-विशिष्ट और अनेक स्रोतों पर आधारित विवरण के रूप में देखें। हर दावे को उसके द्वीप, समुदाय और काल से जोड़ें; पुरातत्व, मौखिक परंपरा और औपनिवेशिक अभिलेखों में अंतर रखें; और प्रतिस्पर्धी व्याख्याएँ दर्ज करें। संरक्षित ज्ञान या सांस्कृतिक सामग्री का उपयोग करने से पहले अनुमति लें और प्रकाशन या प्रस्तुति से पहले स्रोत-प्रामाणिकता तथा पहुँच की शर्तें दर्ज करें।

