भूटान पूर्वी हिमालय में स्थित है और इसकी ऊँचाई लगभग 200 से 7,000 मीटर तक है। इसके प्राकृतिक परिवेश में दक्षिण के उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्र, पर्वतीय घाटियाँ, अल्पाइन चरागाह, हिमनद, आर्द्रभूमियाँ, कृषि क्षेत्र, नदियाँ, झरने और झीलें शामिल हैं। पाँच मुख्य नदी बेसिन आमोछू, वांगछू, पुनात्सांगछू, मांगदेछू और द्रांगमेछू हैं; इनके अलावा पाँच सहायक बेसिन भी हैं। जंगल प्रमुख स्थलीय पारिस्थितिकी तंत्र हैं और देश के लगभग 70 प्रतिशत हिस्से को ढकते हैं। संविधान स्थायी रूप से कम से कम 60 प्रतिशत वनावरण का लक्ष्य तय करता है। संरक्षित क्षेत्रों का नेटवर्क और जैविक गलियारे मिलकर देश की 52 प्रतिशत से अधिक भूमि की रक्षा करते हैं। भूटान वन और प्रकृति संरक्षण अधिनियम 2023 में अन्य श्रेणियों के साथ राष्ट्रीय उद्यान, वन्यजीव अभयारण्य, सख्त प्रकृति आरक्षित क्षेत्र, वनस्पति उद्यान, जीवमंडल आरक्षित क्षेत्र, महत्वपूर्ण जलग्रहण क्षेत्र, जैविक गलियारे और महत्वपूर्ण आर्द्रभूमियाँ अलग की गई हैं। संरक्षित क्षेत्रों में मुख्य, संक्रमण, बफर और बहु-उपयोग ज़ोन हो सकते हैं। मुख्य ज़ोन में खनन, उत्खनन और विकास परियोजनाएँ निषिद्ध हैं। संरक्षित क्षेत्रों के बाहर भी आर्द्रभूमियाँ, कृषि भूमि और मीठे पानी के आवास जैव विविधता के लिए महत्वपूर्ण हैं। भूटान में 11,000 से अधिक प्रजातियाँ दर्ज हैं, जिनमें 5,390 से अधिक बीज पौधे, लगभग 710 वृक्ष प्रजातियाँ, 129 स्तनधारी, 736 पक्षी, 125 मीठे पानी की मछलियाँ, 3,511 कीट और कम से कम 746 कवक प्रजातियाँ शामिल हैं। दर्ज बीज पौधों में लगभग 98 प्रतिशत देशज हैं। प्रमुख प्रतीक प्रजातियों में बाघ, हिम तेंदुआ, एशियाई हाथी, एशियाई काला भालू, लाल पांडा, गोल्डन लंगूर, सफेद पेट वाला बगुला, काली गर्दन वाली सारस और गोल्डन महासीर शामिल हैं। भूटान जैव विविधता पोर्टल (Bhutan Biodiversity Portal) प्रजातियों के अवलोकन, मानचित्र और दस्तावेज़ संकलित करता है और जनता को योगदान देने की सुविधा भी देता है। संरक्षित और विनियमित पौधों तथा पशुओं की प्रजातियाँ कानून की अनुसूची II और III में सूचीबद्ध हैं; संशोधित सूचियाँ 2025 में प्रकाशित हुईं। प्रकृति के लिए एक ही समग्र प्राधिकरण नहीं है। प्रमुख जिम्मेदारियाँ वन और पार्क सेवा विभाग (Department of Forests and Park Services), जिसमें उसका प्रकृति संरक्षण प्रभाग (Nature Conservation Division), राष्ट्रीय जैव विविधता केंद्र (National Biodiversity Centre), जलविज्ञान और मौसम विज्ञान केंद्र (National Center for Hydrology and Meteorology), भूटान पर्यटन परिषद (Tourism Council of Bhutan), जिला प्रशासन (Dzongkhag) और पार्क प्रशासन शामिल हैं। सरकारी आरक्षित जंगलों में वन उत्पादों और गैर-काष्ठ वन उत्पादों का उपयोग केवल स्वीकृत प्रबंधन योजना और आवश्यक परमिट के तहत किया जा सकता है। इसमें लकड़ी, जलावन, सोवा रिग्पा के लिए औषधीय पौधे, मछली पकड़ना, आनुवंशिक संसाधन, जैव-अन्वेषण और आनुवंशिक संसाधनों तक पहुँच शामिल हैं। विभाग की ऑनलाइन प्रणाली लकड़ी, गैर-काष्ठ वन उत्पादों, उनके घरेलू परिवहन, मछली पकड़ने, वन मंजूरी, शोध, आयात और निर्यात तथा अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव व्यापार अभिसमय (CITES) से जुड़ी सेवाएँ देती है। 2023 में वन संबंधी 1,318 अपराध दर्ज किए गए; अवैध उपयोग, अवैध शिकार और व्यापार प्रमुख जोखिम बने हुए हैं। प्रकृति-आधारित पर्यटन में ट्रेकिंग, पक्षी-दर्शन, विनियमित फ्लाई-फिशिंग, वन्यजीव अवलोकन और समुदाय-आधारित होमस्टे शामिल हैं। कई संरक्षित क्षेत्रों के लिए पार्क परमिट विभाग की प्रणाली के माध्यम से ऑनलाइन माँगा जाता है। आवेदन में राष्ट्रीयता, समूह का आकार, यात्रा की तारीखें, संरक्षित क्षेत्र, विशिष्ट स्थान, उद्देश्य और ट्रेकिंग मार्ग सहित विवरण शामिल होते हैं। संरक्षित या सुरक्षा क्षेत्रों में ट्रेकिंग के लिए ट्रेकिंग परमिट चाहिए; लाइसेंसधारी ट्रेकिंग गाइड, निर्धारित पगडंडियाँ और कैंप स्थल पहुँच व्यवस्था का हिस्सा हैं। 18 वर्ष से कम आयु वालों के साथ माता-पिता या कानूनी अभिभावक होना चाहिए या उनकी लिखित सहमति चाहिए। उद्धृत ऑनलाइन पृष्ठ पर शुल्क और प्रक्रिया अवधि के सामान्य आँकड़े नहीं दिए गए हैं; इन्हें जिम्मेदार संरक्षित-क्षेत्र कार्यालय से जाँचना होगा। प्राकृतिक प्रक्रियाएँ पहुँच और उपयोग को जोखिम में डाल सकती हैं। इनमें हिमनदीय झीलों के फटने से बाढ़, अचानक बाढ़, भूस्खलन, आँधी, नदी का कटाव और सूखा शामिल हैं। 70 प्रतिशत से अधिक बस्तियाँ, आधारभूत ढाँचा और कृषि भूमि मुख्य जल-निकासी बेसिनों के किनारे हैं। 2021 में भूटान में कुल 567 हिमनदीय झीलें थीं, जिनमें 17 को संभावित रूप से खतरनाक वर्गीकृत किया गया था। जलविज्ञान और मौसम विज्ञान केंद्र का क्रायोस्फीयर सेवा प्रभाग (Cryosphere Services Division) हिमनदों और हिमनदीय झीलों की निगरानी, सूचीकरण और जोखिम आकलन करता है तथा चेतावनियाँ देता है। सामान्य आपदा संरक्षण अलग विषय क्षेत्र है; यहाँ प्रकृति तक पहुँच के लिए प्रासंगिक पहलू प्राकृतिक प्रक्रिया, जोखिम-संपर्क, चेतावनी और पहुँच प्रतिबंध हैं। राष्ट्रीय जैव विविधता केंद्र रॉयल बॉटैनिकल गार्डन सेरबिथांग में जैव विविधता व्याख्या केंद्र, प्रयोगशालाएँ, जीन बैंक और एक हर्बेरियम चलाता है। आम जनता इन सुविधाओं में बिना पूर्व शैक्षणिक पंजीकरण के जा सकती है। शैक्षणिक भ्रमण के लिए कम से कम कई दिन पहले सूचना देना संभव है और शैक्षणिक संस्थानों के लिए यह निःशुल्क है; शोध संस्थानों को भी पहले संपर्क करना चाहिए। पर्यावरण शिक्षा का संस्थागत समन्वय अभी पूर्ण नहीं है। संचार, शिक्षा, जन जागरूकता और जागरूकता-वृद्धि के लिए राष्ट्रीय मास्टर प्लान अभी उपलब्ध नहीं है; जैव विविधता रणनीति 2030 तक ऐसी योजना और उसके क्रियान्वयन की परिकल्पना करती है। ग्रामीण क्षेत्रों में मानव-वन्यजीव संघर्ष से फसल का नुकसान, पशुधन पर हमले, सुरक्षा जोखिम तथा अतिरिक्त श्रम और रोकथाम लागत पैदा होती है। जंगली सूअर, बंदर, हिरण, हाथी, भालू और बाघ अक्सर संघर्ष में शामिल प्रजातियों में गिने जाते हैं। क्षेत्र और परिस्थिति के अनुसार फसल का नुकसान वार्षिक उत्पादन का लगभग 19 से 43 प्रतिशत होता है, औसत लगभग 30 प्रतिशत है। सुरक्षा उपायों, डराने के तरीकों, सामुदायिक समाधानों और संरक्षित क्षेत्रों के प्रबंधन का उद्देश्य सह-अस्तित्व बेहतर करना है। देशव्यापी निश्चित मुआवज़े या बीमा लाभ की पुष्टि नहीं है; जैव विविधता रणनीति में फसलों और पशुधन के लिए राष्ट्रीय बीमा योजना प्रस्तावित है। संविधान के अनुच्छेद 5(1) के तहत हर भूटानी व्यक्ति को प्राकृतिक संसाधनों और पर्यावरण का न्यासी माना जाता है। इसमें पर्यावरण और जैव विविधता की रक्षा तथा पारिस्थितिक क्षति रोकने का दायित्व शामिल है। वैध पहुँच ज़ोन, परमिट, प्रबंधन योजना और जहाँ लागू हो, गाइड पर भी निर्भर करती है। शोध, फिल्मांकन, राफ्टिंग, मछली पकड़ने और CITES-संबंधी गतिविधियों के लिए अलग विशेष परमिट आवश्यक हो सकते हैं।
भूटान में प्रकृति
भूटान की प्रकृति में उपोष्णकटिबंधीय तराई से लेकर भीतरी पर्वतीय घाटियों, अल्पाइन ऊँचाइयों और हिमनदों तक के क्षेत्र शामिल हैं। देश का लगभग 70 प्रतिशत भाग जंगलों से ढका है; जैविक गलियारों सहित 52 प्रतिशत से अधिक भूमि संरक्षित है। प्रकृति तक पहुँच, उसका उपयोग और शोध संरक्षित क्षेत्र के ज़ोन, परमिट और प्रबंधन योजनाओं पर निर्भर करते हैं।
सुझाव
भूटान की प्रकृति तक पहुँच की योजना बनाते समय केवल गंतव्य नहीं, बल्कि उद्देश्य, संरक्षित क्षेत्र, ज़ोन और नियोजित गतिविधि भी ध्यान में रखें। ट्रेकिंग, शोध, मछली पकड़ने, फिल्मांकन और वन संसाधनों के उपयोग के लिए अलग-अलग परमिट चाहिए; स्पष्ट न हों तो शुल्क और प्रक्रिया अवधि जिम्मेदार प्राधिकरण से सीधे जाँचें।

