ऋण: भारत में

भारत में ऋण में बैंकों, वित्त कंपनियों, सहकारी संस्थाओं, नियोक्ताओं, व्यापारियों, डिजिटल सेवाओं या व्यक्तिगत संपर्कों से उधार लिया गया धन शामिल है। चुकौती अक्सर समान मासिक किस्त (Equated Monthly Instalment), जिसे आम तौर पर EMI कहा जाता है, के रूप में व्यवस्थित की जाती है। उधार उपयोगी उद्देश्यों में सहायता कर सकता है, लेकिन अस्पष्ट शर्तें या ऐसी किस्तें जिन्हें चुकाना संभव न हो, पूरे घरेलू बजट को नुकसान पहुँचा सकती हैं।

सुझाव

भारत में ऋण लेने से पहले जाँचें कि आवश्यक खर्चों और आपातकालीन बचत के बाद भुगतान संभव है या नहीं। केवल EMI नहीं, बल्कि कुल चुकौती की तुलना करें और हर दस्तावेज़ तथा भुगतान रिकॉर्ड की पूरी प्रति रखें।