स्पेनी विजय से बहुत पहले मध्य एंडीज़ में जटिल समाज थे, जिनमें टिटिकाका झील के पास का तिवानाकू भी शामिल था। उपनिवेश-पूर्व काल के अंतिम दौर में इंका राज्य ने इस क्षेत्र के कुछ हिस्सों को अपनी व्यापक राजनीतिक व्यवस्था में शामिल किया। स्पेनी शासन ने खनन, औपनिवेशिक प्रशासन और कैथोलिक संस्थाओं के इर्द-गिर्द क्षेत्र का पुनर्गठन किया। आज का अधिकांश बोलीविया ऑदिएन्सिया दे चारकास का हिस्सा था और आर्थिक रूप से पोतोसी के चाँदी-खनन केंद्र से जुड़ा था। बोलीविया ने 1825 में स्पेनी शासन से स्वतंत्रता घोषित की। नए गणराज्य को गहरी सामाजिक और आर्थिक असमानताएँ विरासत में मिलीं; उसकी सीमाएँ और राजनीतिक संस्थाएँ बार-बार बदलीं। प्रशांत युद्ध में बोलीविया ने अपना तटीय क्षेत्र चिली को खो दिया और संप्रभु समुद्री तट से वंचित देश बन गया। 1930 के दशक में पराग्वे के साथ चाको युद्ध ने भी सेना, राज्य और राजनीतिक बहस पर लंबे समय तक प्रभाव डाला। 1952 की राष्ट्रीय क्रांति में मुख्य टिन खानों का राष्ट्रीयकरण, मतदान-अधिकारों का विस्तार और कृषि सुधार प्रक्रिया जैसी बड़ी पहलें हुईं। बाद के दशकों में सैन्य सरकारें, लोकतांत्रिक परिवर्तन, आर्थिक पुनर्गठन और मजबूत मूलनिवासी तथा क्षेत्रीय आंदोलन आए। 2009 के संविधान ने देश का नाम बहुराष्ट्रीय राज्य बोलीविया रखा और राज्य-व्यवस्था में मूलनिवासी राष्ट्रों तथा समुदायों को मान्यता दी। औपनिवेशिक शोषण, मूलनिवासी निरंतरता, क्षेत्रीय स्वायत्तता, संसाधनों के नियंत्रण और इन राजनीतिक परिवर्तनों के अर्थ पर ऐतिहासिक व्याख्याएँ अक्सर अलग-अलग होती हैं।
बोलीविया में इतिहास
बोलीविया के इतिहास में मूलनिवासी समाज, स्पेनी औपनिवेशिक शासन, स्वतंत्रता, क्षेत्रीय संघर्ष, सामाजिक क्रांतियाँ और बड़े संवैधानिक बदलाव शामिल हैं। तिवानाकू, इंका काल, औपनिवेशिक ऑदिएन्सिया दे चारकास, 1825 में स्थापित गणराज्य और 2009 के संविधान से बना बहुराष्ट्रीय राज्य प्रमुख पड़ाव हैं। इन घटनाओं का प्रभाव आज भी बोलीविया की संस्थाओं, क्षेत्रीय भिन्नताओं और सार्वजनिक स्मृति पर है।
सुझाव
बोलीविया के इतिहास को वर्तमान संस्थाओं, क्षेत्रीय भिन्नताओं और पहचान, भूभाग तथा संसाधन-नियंत्रण से जुड़ी बहसों को समझने का आधार बनाएँ। भरोसेमंद परिचय में प्रमुख पड़ावों को आपस में जोड़ें; स्वतंत्रता, 1952 की क्रांति या 2009 के संविधान को अतीत से पूरी तरह अलग शुरुआत न मानें।

