बांग्लादेश का पर्यावरण गंगा-ब्रह्मपुत्र-मेघना डेल्टा, मानसूनी वर्षा, नदियों, आर्द्रभूमियों, बाढ़भूमियों, तटीय जल और बंगाल की खाड़ी से प्रभावित है। सुंदरवन (Sundarbans), पहाड़ी वन और अन्य प्राकृतिक क्षेत्र जैव-विविधता तथा मछली पकड़ने, शहद एकत्र करने और वन-उत्पादों जैसी आजीविकाओं का सहारा देते हैं। बाढ़, ज्वारीय जल, नदी का कटाव, लवणता और वन्यजीवों से सामना लोगों के इन स्थानों के उपयोग को प्रभावित करते हैं। रोज़मर्रा का परिवेश घरों, कार्यस्थलों, स्कूलों और सार्वजनिक सुविधाओं के आसपास की व्यावहारिक स्थितियों को शामिल करता है। जल और स्वच्छता, कचरा संग्रह, जलनिकासी, बिजली, स्थानीय सड़कें, वायु गुणवत्ता, शोर, गर्मी, हरित क्षेत्र और आपदाओं का जोखिम स्वास्थ्य, आवाजाही और दैनिक सुरक्षा को प्रभावित कर सकते हैं। ये स्थितियाँ पूरे बांग्लादेश में एक जैसी नहीं हैं। ढाका, चटगाँव, खुलना, राजशाही, बरीसाल, सिलहट और छोटे स्थानों में सेवाएँ, जोखिम और जिम्मेदार निकाय अलग-अलग हो सकते हैं। प्रकृति और रोज़मर्रा का परिवेश एक-दूसरे से जुड़े हो सकते हैं, लेकिन वे एक ही चीज़ नहीं हैं। आर्द्रभूमि एक प्राकृतिक प्रणाली है, जबकि किसी बस्ती के पास बंद जलनिकासी रोज़मर्रा के परिवेश की समस्या है; दोनों बाढ़ को और गंभीर बना सकते हैं। संरक्षित क्षेत्र, प्रजाति संरक्षण, विनियमित मछली पकड़ना और वन-उपयोग नियम संरक्षण को स्थानीय आजीविकाओं से जोड़ते हैं। स्थानीय सरकार, राष्ट्रीय एजेंसियाँ, उपयोगिता संस्थाएँ, सामुदायिक संगठन और निजी सेवा प्रदाता अलग-अलग सेवाओं या पर्यावरणीय समस्याओं को संभाल सकते हैं। इसलिए जिम्मेदार निकाय वास्तविक स्थान और समस्या पर निर्भर करता है।
पर्यावरण: बांग्लादेश में
बांग्लादेश के पर्यावरण में प्राकृतिक प्रणालियाँ और वह परिवेश दोनों शामिल हैं जिसमें लोग रहते और काम करते हैं। नदियाँ, आर्द्रभूमियाँ, वन, तट और वन्यजीव प्रकृति का हिस्सा हैं, जबकि जलापूर्ति, स्वच्छता, कचरा, जलनिकासी, हवा, शोर, गर्मी और पहुँच मार्ग रोज़मर्रा के परिवेश को प्रभावित करते हैं। सेवाओं, जोखिमों और जिम्मेदार प्राधिकरणों में अंतर के कारण शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों तथा अलग-अलग इलाकों की स्थितियाँ बहुत भिन्न होती हैं।
सुझाव
बांग्लादेश के पर्यावरण को एक समान व्यवस्था मानने के बजाय सटीक स्थान और ठोस चिंता से शुरुआत करें। तय करें कि मामला मुख्य रूप से प्रकृति, रोज़मर्रा के परिवेश या दोनों से जुड़ा है। फिर जिम्मेदार निकाय और स्वास्थ्य, पहुँच, आजीविका या सुरक्षा पर पड़ने वाले प्रभावों की पहचान करें।

