यूरोपीय लोगों के आने से पहले लुकायन लोग पूरे बहामी द्वीपसमूह में रहते थे। क्रिस्टोफर कोलंबस 1492 में इस क्षेत्र के एक द्वीप पर पहुँचे, जिसे आम तौर पर सैन साल्वाडोर माना जाता है। इसके बाद स्पेनिश छापों, गुलामी, बीमारी और जबरन विस्थापन से लुकायन आबादी ढह गई। सत्रहवीं सदी से ब्रिटिश बसावट बढ़ी; इसमें एल्युथेरन एडवेंचरर्स द्वारा एल्युथेरा की बसावट शामिल थी। बाद में नासाउ समुद्री लुटेरों से जुड़ा, जब तक कि अठारहवीं सदी की शुरुआत में ब्रिटिश अधिकारियों ने फिर नियंत्रण स्थापित नहीं किया। बहामास सदियों तक ब्रिटिश शासन के अधीन रहा। अमेरिकी क्रांति के बाद संयुक्त राज्य छोड़कर आए वफादारों ने गुलाम बनाए गए अफ्रीकियों को साथ लाया और बागान उत्पादन बढ़ाया, हालांकि द्वीपों के भूगोल ने अन्य कैरेबियाई उपनिवेशों की तुलना में बड़े पैमाने की बागान कृषि सीमित रखी। ब्रिटेन ने 1830 के दशक में साम्राज्य में गुलामी समाप्त की; पूर्ण मुक्ति 1838 में लागू हुई। इसके बाद पूर्व में गुलाम बनाए गए समुदायों ने द्वीपों की अर्थव्यवस्था, चर्चों, बस्तियों, राजनीतिक आंदोलनों और सांस्कृतिक जीवन को आकार दिया, जबकि नस्लीय और आर्थिक असमानता बनी रही। बीसवीं सदी में पर्यटन, प्रवासन, वाणिज्य और वित्तीय सेवाओं ने नासाउ तथा अन्य आबादी केंद्रों को बदल दिया। राजनीतिक सुधारों ने धीरे-धीरे अश्वेत बहुसंख्यक की भागीदारी बढ़ाई। बहुमत शासन 1967 में शुरू हुआ और 10 जुलाई 1973 को बहामास स्वतंत्र देश बना, जबकि राष्ट्रमंडल का सदस्य बना रहा। इतिहास की व्याख्या में आज भी मूलनिवासी आबादी का विनाश, गुलामी, औपनिवेशिक सत्ता, प्रवासन, स्वतंत्रता और समुदायों द्वारा अतीत को संजोने तथा उस पर विवाद करने के तरीकों पर विचार किया जाता है।
बहामास का इतिहास
बहामास का इतिहास यूरोपीय उपनिवेशीकरण से पहले के लुकायन समुदायों से लेकर 1973 में स्थापित स्वतंत्र राज्य तक फैला है। स्पेनिश और ब्रिटिश शासन, जबरन विस्थापन और गुलामी, मुक्ति तथा पर्यटन के विकास ने द्वीपों को बदल दिया। पुरातत्व, औपनिवेशिक अभिलेख, मौखिक इतिहास और अफ्रीकी-बहामी स्मृतियाँ इस विकास को अलग-अलग दृष्टिकोणों से दिखाती हैं।
सुझाव
बहामास के इतिहास को अलग-अलग तारीखों की सूची के बजाय आपस में जुड़ी समयरेखा के रूप में देखें। भरोसेमंद समझ के लिए पुरातात्विक साक्ष्य, औपनिवेशिक अभिलेख, मौखिक इतिहास और अफ्रीकी-बहामी स्मृतियों की तुलना करें, विशेषकर मूलनिवासी आबादी के विनाश, गुलामी या औपनिवेशिक शासन पर विचार करते समय। स्थापित तारीखों को व्याख्याओं और अनिश्चित पहचानों से अलग रखें।

