इस्लाम बहरीन का आधिकारिक धर्म है और मूल्यों, रीति-रिवाजों तथा सार्वजनिक जीवन की लय का एक प्रमुख स्रोत है। मुसलमान मूल मान्यताओं और आचरणों को साझा करते हैं, हालांकि उनकी व्याख्याएँ और सामुदायिक परंपराएँ अलग-अलग हो सकती हैं। बहरीन में सुन्नी और शिया मुसलमान दोनों हैं। ये व्यापक नाम अपने भीतर विविध समुदायों को समेटते हैं और इनके आधार पर किसी व्यक्ति की राय, आचरण या पहचान का अनुमान नहीं लगाना चाहिए। मस्जिदें नमाज़, सीखने, दान और सामुदायिक संपर्क के स्थान प्रदान करती हैं। शिया सामुदायिक जीवन में शिया सामुदायिक सभा-स्थल (ma'tam) भी शामिल हो सकता है, जो धार्मिक स्मरण और सामाजिक गतिविधियों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। मुसलमानों का रोज़े का महीना (Ramadan) दैनिक दिनचर्या बदल देता है। सूर्यास्त के बाद परिवार और समुदाय एकत्र होते हैं, दान-परोपकार अधिक स्पष्ट दिखाई देता है और सार्वजनिक जीवन में संवेदनशील व्यवहार महत्वपूर्ण होता है। रमज़ान के बाद आने वाला ईद त्योहार (Eid al-Fitr) आता है, जबकि तीर्थयात्रा और बलिदान से जुड़ा ईद त्योहार (Eid al-Adha) हज और बलिदान से संबंधित है। नमाज़, पारिवारिक मुलाकातें, साझा भोजन, उपहार और ज़रूरतमंदों की सहायता इनके सामान्य विषय हैं। धार्मिक स्मरण-समारोहों में भाषण, जुलूस, शोक-सभाएँ या उत्सव शामिल हो सकते हैं। बड़े अवसरों के आसपास यातायात, खुलने के समय और पड़ोस का माहौल बदल सकता है। ईसाई, हिंदू, यहूदी और अन्य मान्यताओं वाले लोग भी बहरीन के सामाजिक परिदृश्य का हिस्सा हैं। उपासना-स्थल और निजी धार्मिक आचरण देश के व्यापार और प्रवासन के इतिहास को दर्शाते हैं। धर्म अपनापन, नैतिक मार्गदर्शन, सेवा और पारस्परिक सहायता प्रदान कर सकता है। सम्मानपूर्ण सह-अस्तित्व के लिए रूढ़ धारणाओं से बचना, व्यक्तिगत अंतरात्मा का सम्मान करना और उपासना तथा पवित्र अवसरों के दौरान उचित व्यवहार करना आवश्यक है।
धार्मिक जीवन — बहरीन में
बहरीन में धर्म इस्लाम पर केंद्रित है। सुन्नी और शिया मुस्लिम समुदाय समाज के महत्वपूर्ण हिस्से हैं। नमाज़, रमज़ान, ईद के उत्सव, दान और धार्मिक सभाएँ सार्वजनिक तथा पारिवारिक जीवन को प्रभावित करती हैं। बहरीन में अन्य धर्मों से जुड़े पुराने और नए समुदाय भी हैं।
सुझाव
बहरीन में नमाज़, रोज़े, पवित्र स्थानों और धार्मिक अवसरों के स्वरूप पर ध्यान दें। लोगों के पहनावे या सामुदायिक पृष्ठभूमि से अनुमान लगाने के बजाय उनसे पूछें कि वे व्यक्तिगत रूप से अपने धर्म का पालन कैसे करते हैं। रमज़ान और धार्मिक स्मरण-समारोहों के दौरान दैनिक गतिविधियों की योजना अतिरिक्त धैर्य और संवेदनशीलता के साथ बनाएँ।

