आज के तंज़ानिया के क्षेत्र में बहुत प्राचीन काल से लोग रहते आए हैं। पुरातात्विक साक्ष्य शुरुआती मानव गतिविधि, बसावट और आदान-प्रदान को दर्ज करते हैं। बाद की सदियों में मुख्यभूमि पर कृषि और पशुपालन करने वाले समुदाय विकसित हुए, जबकि तट स्वाहिली दुनिया का हिस्सा बना। इसके नगरों ने पूर्वी अफ्रीका को अरब, फ़ारस, भारत और हिंद महासागर के अन्य क्षेत्रों से जोड़ा। किल्वा किसिवानी और अन्य तटीय केंद्र सोने और हाथीदाँत जैसी वस्तुओं के व्यापार से समृद्ध हुए, हालांकि समय के साथ इस व्यापार का पैमाना और संगठन बदलता रहा। उन्नीसवीं सदी में यूरोपीय विस्तार ने राजनीतिक नियंत्रण बदल दिया। जर्मनी ने उन्नीसवीं सदी के उत्तरार्ध में मुख्यभूमि के बड़े हिस्से पर औपनिवेशिक शासन स्थापित किया। प्रथम विश्व युद्ध के बाद ब्रिटेन ने राष्ट्र संघ के अधिदेश के तहत और बाद में संयुक्त राष्ट्र के न्यास क्षेत्र के रूप में टांगानिका का प्रशासन किया। टांगानिका 1961 में स्वतंत्र हुआ। ज़ांज़ीबार ने 1963 में स्वतंत्रता प्राप्त की और 1964 में वहाँ क्रांति हुई। अप्रैल 1964 में टांगानिका और ज़ांज़ीबार ने संयुक्त गणराज्य तंज़ानिया बनाया। संघ के भीतर ज़ांज़ीबार ने अपनी सरकार और राजनीतिक संस्थाएँ बनाए रखीं। स्वतंत्रता के बाद जूलियस न्येरेरे ने उजामा को बढ़ावा दिया—यह नीति अफ्रीकी समाजवाद, ग्रामीण सहयोग और राज्य-नेतृत्व वाले विकास से जुड़ी थी। गाँवों में लोगों को बसाने की नीति ने बस्तियों और उत्पादन को नया रूप दिया, लेकिन उसके प्रभावों पर बहस जारी है, क्योंकि इसे लागू करने में दबाव, विस्थापन और आर्थिक बाधाएँ शामिल हो सकती थीं। बाद में तंज़ानिया ने बहुदलीय राजनीति अपनाई और आर्थिक नीतियाँ बदलीं। संघ अब भी प्रतिनिधित्व, अधिकार तथा संघ सरकार और ज़ांज़ीबार के बीच जिम्मेदारियों के बँटवारे पर बहस को प्रभावित करता है। ऐतिहासिक व्याख्याएँ इस्तेमाल किए गए स्रोतों पर निर्भर करती हैं। पुरातात्विक अवशेष उन कालखंडों के पुनर्निर्माण में मदद करते हैं जिनके लिखित अभिलेख कम हैं। मौखिक इतिहास समुदायों की स्मृतियाँ, वंशावलियाँ और राजनीतिक बदलावों के विवरण सुरक्षित रखता है, लेकिन उसे दूसरे साक्ष्यों से मिलाकर देखना चाहिए क्योंकि स्मृतियाँ अलग-अलग हो सकती हैं। औपनिवेशिक अभिलेख प्रशासन के बारे में विस्तृत जानकारी देते हैं, पर उनमें औपनिवेशिक प्राथमिकताएँ और वर्गीकरण भी झलकते हैं। इसलिए शोधकर्ता स्रोतों की तुलना करते हैं और दर्ज घटनाओं को बाद की व्याख्या से अलग रखते हैं। तंज़ानिया के इतिहास को समझने के लिए मुख्यभूमि, ज़ांज़ीबार और प्रवासन, व्यापार, धर्म तथा राजनीतिक बदलाव से जुड़े अनेक समुदायों के अलग-अलग अनुभवों पर ध्यान देना भी आवश्यक है।
तंज़ानिया का इतिहास
तंज़ानिया का इतिहास मुख्यभूमि और ज़ांज़ीबार के समाजों, हिंद महासागर के पार लंबे समय से चले आ रहे व्यापार, औपनिवेशिक शासन, स्वतंत्रता और संयुक्त गणराज्य तंज़ानिया के गठन को समेटता है। पहले के कालखंडों की जानकारी पुरातत्व, मौखिक परंपराओं और अफ्रीकी, अरब, फ़ारसी, यूरोपीय तथा एशियाई समुदायों के लिखित स्रोतों से मिलती है। देश की वर्तमान सीमाएँ और संस्थाएँ कई राजनीतिक बदलावों के बाद बनीं; वे किसी एक निरंतर राज्य से उत्पन्न नहीं हुईं।
सुझाव
तंज़ानिया के इतिहास को मुख्यभूमि की एकल समयरेखा के बजाय कई परतों वाले विवरण के रूप में देखें। टांगानिका और ज़ांज़ीबार को अलग रखें, 1964 के संघ को स्पष्ट रूप से चिह्नित करें, और दावों को उनके स्रोत के प्रकार, काल, स्थान और दृष्टिकोण की तुलना करके परखें।

