ग्रैंड बे से मिले साक्ष्य बताते हैं कि अमेरिंडियन लोग 2,000 से अधिक वर्ष पहले यहाँ रहते थे। पुराने आधिकारिक सारांशों में लगभग 400 ईस्वी के आसपास अरावाक प्रवास और उसके बाद कालिनागो बसावट का वर्णन है, लेकिन एक समूह द्वारा दूसरे समूह को पूरी तरह बदल देने की सरल कहानी विवादित है। कालिनागो की मौखिक परंपरा, पुरातत्व, भौतिक संस्कृति और औपनिवेशिक अभिलेख अलग-अलग दृष्टिकोण देते हैं। कैरिब, इंडियन और नरभक्षण से जुड़े औपनिवेशिक वर्णनों को उनके स्रोत और उद्देश्य के संदर्भ में सावधानी से देखना चाहिए। डोमिनिका के शुरुआती काल के लिए स्थानीय लिखित अभिलेखागार का कोई समकक्ष नहीं है, इसलिए इतिहासकार कई तरह के साक्ष्यों की तुलना करते हैं। यूरोपीय संपर्क पंद्रहवीं शताब्दी के उत्तरार्ध में शुरू हुआ। स्पेन ने यहाँ स्थायी बस्ती नहीं बनाई। फ्रांस और इंग्लैंड ने 1660 में तटस्थ रहने की व्यवस्था की; फ्रांस ने 1727 से द्वीप पर नियंत्रण रखा, ब्रिटेन ने 1761 में इसे जीत लिया और 1763 में औपचारिक रूप से प्राप्त किया, फिर फ्रांस ने 1778 से 1784 तक इस पर कब्ज़ा किया। 1795 और 1805 में फ्रांसीसी आक्रमण हुए। बागानों के विस्तार के लिए लोगों को दास बनाया गया और अफ्रीका से जबरन लाया गया; इससे कालिनागो समुदाय विस्थापित हुए या उनका सामना हुआ। भागे हुए मरून लोगों, स्थानीय फ्रांसीसी और क्वेयोल के विकास तथा अफ्रीकी-यूरोपीय सामाजिक समूहों ने भी द्वीप के इतिहास को आकार दिया। फोर्ट शर्ली का निर्माण 1765 में शुरू हुआ। कैब्रिट्स क्षेत्र में ब्रिटिश और फ्रांसीसी किलेबंदियाँ आज भी मौजूद हैं, जिनका निर्माण आंशिक रूप से दास बनाए गए लोगों के श्रम से हुआ था। 1802 में 8वीं वेस्ट इंडिया रेजिमेंट का विद्रोह ब्रिटिश दास-सैनिकों की मुक्ति के व्यापक इतिहास और 1807 में दास व्यापार के उन्मूलन से जुड़ा है—यूनेस्को के दस्तावेज़ों में ऐसा संबंध बताया गया है, हालाँकि इस कारण-संबंध की व्याख्या को साम्राज्यिक अभिलेखों से जाँचना चाहिए। दूसरा मरून युद्ध 1812 से 1814 तक चला। 1838 में पूर्ण मुक्ति हुई, जिसके बाद बागान छोड़ने, किसानों की बसावट और भूमि विवादों का दौर आया। 1844 में जनगणना दंगे हुए, जिन्हें ला गुएर नेग्रे भी कहा जाता है। मुक्ति की स्मृति हर साल लगभग 1 अगस्त के आसपास होने वाले समारोहों में आज भी दिखाई देती है। डोमिनिका क्राउन कॉलोनी शासन से अधिक व्यापक प्रतिनिधित्व की ओर बढ़ा। सभी वयस्कों को मताधिकार 1951 में मिला, मंत्रिमंडलीय शासन 1956 में शुरू हुआ और वेस्ट इंडीज फेडरेशन 1958 से 1962 तक अस्तित्व में रहा। संबद्ध राज्य का दर्जा 1 मार्च 1967 को शुरू हुआ। 3 नवंबर 1978 को संविधान आदेश 1978 के तहत ब्रिटेन से स्वतंत्रता मिली। 1979 का संवैधानिक और राजनीतिक संकट हरिकेन डेविड के साथ ही आया। बाद के इतिहास में दलों के बीच प्रतिस्पर्धा, क्षेत्रीय एकीकरण और स्वतंत्रता के संविधान के तहत निरंतरता शामिल है। 2015 में उष्णकटिबंधीय तूफान एरिका ने डोमिनिका को प्रभावित किया। 18 सितंबर 2017 को श्रेणी 5 के हरिकेन मारिया ने यहाँ तट पर दस्तक दी। आधिकारिक पुनर्प्राप्ति आकलनों के अनुसार लगभग 80% आबादी सीधे प्रभावित हुई, 65 लोगों की मृत्यु हुई, 90% से अधिक घर क्षतिग्रस्त हुए या नष्ट हो गए, और फसलों तथा पशुधन का लगभग 90% नुकसान हुआ। मारिया के बाद की पुनर्प्राप्ति और राष्ट्रीय लचीलापन समकालीन ऐतिहासिक स्मृति का बड़ा हिस्सा हैं। 2015 में पारित कानून के तहत कैरिब रिज़र्व का नाम बदलकर कालिनागो टेरिटरी रखा गया, जिससे स्वदेशी क्षेत्रीय शासन और अपना प्रतिनिधित्व करने का महत्व और स्पष्ट हुआ। ऐतिहासिक संरक्षण और व्याख्या की ज़िम्मेदारी कई संस्थाओं में बँटी है। नेशनल आर्काइव्स और डोमिनिका लाइब्रेरी एंड इन्फॉर्मेशन सर्विस दस्तावेज़ी अभिलेख सुरक्षित रखते हैं; डिविज़न ऑफ कल्चर विरासत संरक्षण और सामुदायिक इतिहास का समर्थन करता है; फॉरेस्ट्री डिविज़न फोर्ट शर्ली और कैब्रिट्स नेशनल पार्क का प्रबंधन करता है; कालिनागो टेरिटरी काउंसिल और सरकारी निकाय क्षेत्रीय शासन तथा स्वदेशी विरासत का समर्थन करते हैं; और यूनेस्को नेशनल कमीशन अंतरराष्ट्रीय विरासत रिपोर्टों और नामांकन का काम करता है। फोर्ट शर्ली और कैब्रिट्स नेशनल पार्क 1986 में नेशनल पार्क्स एक्ट 1975 के तहत स्थापित हुआ; इसका जीर्णोद्धार 1982 में शुरू हुआ और 2015 में यह यूनेस्को की अस्थायी सूची में शामिल हुआ। कालिनागो बराना ऑते शिल्प, मौखिक प्रस्तुतियों और पगडंडियों के माध्यम से समुदाय के नेतृत्व में व्याख्या प्रस्तुत करता है। मोर्ने ट्रोआ पितों नेशनल पार्क 1997 से यूनेस्को का विश्व धरोहर प्राकृतिक स्थल है; इसके ऐतिहासिक संदर्भ को अलग ऐतिहासिक दर्जे के साथ नहीं मिलाना चाहिए। नेशनल आर्काइव्स की शुरुआत 1968 में किए गए एक सर्वेक्षण से हुई और 2004 में उसे स्थायी स्थान मिला। इसके संग्रह में 1783 से 1834 और 1817 से 1834 के विलेख, दासता और मुक्ति-अभिलेख; 1799 से 1966 की विधान परिषद की कार्यवाही; 1787 से 1976 की विधानसभा की कार्यवाही; 1827 से 1939 के गवर्नर के प्रेषण; और 1821 से 2008 के समाचारपत्र शामिल हैं। आम लोग और शोधकर्ता अनुरोध फ़ॉर्म के ज़रिए सार्वजनिक शोध कक्ष का उपयोग कर सकते हैं। वहाँ सामान्यतः पेंसिल और कागज़ का उपयोग किया जाता है; अभिलेखों से भोजन और पेय दूर रखें, दस्तावेज़ सावधानी से सँभालें और उनकी तस्वीर लेने या डिजिटाइज़ करने से पहले अनुमति लें। प्रतिलिपि या पुनरुत्पादन के लिए अनुमति, उपयोग का विवरण, श्रेय और शुल्क लग सकता है। प्रकाशित शुल्क-सूचियाँ और सुनिश्चित समय-सीमाएँ लगातार उपलब्ध नहीं हैं, इसलिए पहले संपर्क करना ज़रूरी है। नाज़ुक या प्रतिबंधित अभिलेखों तक पहुँच सीमित हो सकती है। कॉपीराइट और अन्य बौद्धिक संपदा संबंधी दायित्व शोधकर्ताओं की ज़िम्मेदारी हैं।
डोमिनिका का इतिहास
डोमिनिका का इतिहास कालिनागो समुदाय की निरंतर उपस्थिति, अमेरिंडियन बसावट, औपनिवेशिक शासन, दासता और मुक्ति, स्वतंत्रता तथा बड़ी आपदाओं के प्रति द्वीप की प्रतिक्रियाओं को समेटता है। पुरातत्व, मौखिक परंपरा, भौतिक संस्कृति, औपनिवेशिक अभिलेख और बाद के अभिलेखागार अलग-अलग प्रकार के साक्ष्य देते हैं। अरावाक और कैरिब जैसे नामों के संदर्भ पर ध्यान देना आवश्यक है, क्योंकि लोगों के पुराने विस्थापन की कथाएँ विवादित हैं। डोमिनिका 3 नवंबर 1978 को ब्रिटेन से स्वतंत्र हुआ, और 2017 में आए हरिकेन मारिया जैसी घटनाएँ आज भी राष्ट्रीय ऐतिहासिक स्मृति का हिस्सा हैं।
सुझाव
इस इतिहास को स्रोतों, स्थानों और सार्वजनिक स्मृतियों की जाँच के लिए एक रूपरेखा मानें, न कि एक स्थिर कथा। स्वदेशी निरंतरता, औपनिवेशिक शासन, दासता और मुक्ति, स्वतंत्रता तथा आपदा के बाद पुनर्प्राप्ति के स्थानीय क्रम से शुरुआत करें; फिर अपने प्रश्न के अनुसार साक्ष्य या संस्था चुनें। विवादित नामों, औपनिवेशिक अभिलेखों और अभिलेखागार तक अनिश्चित पहुँच को स्रोतों की तुलना करने और उनकी सीमाएँ दर्ज करने का कारण समझें।

