जिबूती के भू-दृश्य अफ़ार दरार घाटी, तदजूरा की खाड़ी, बाब-अल-मंदेब और लाल सागर से आकार लेते हैं। इनमें शुष्क रेगिस्तान और स्टेपी, गोदा और माबला पर्वत, बेसाल्ट ज्वालामुखीय भूभाग, नमक की झीलें, गर्म जलस्रोत, फ्यूमरोल—भाप या ज्वालामुखीय गैस छोड़ने वाले छिद्र—और चूना-पत्थर संरचनाएँ शामिल हैं। लाक अस्सल समुद्र तल से लगभग 153 से 155 मीटर नीचे है और अतिलवणीय है, यानी इसके पानी में समुद्री पानी से कहीं अधिक नमक है। लाक आबे गर्म जलस्रोतों और प्रभावशाली चूना-पत्थर मीनारों के लिए जाना जाता है। मौसमी जलधाराएँ, जिन्हें वादी (oued) कहते हैं, वर्षा के बाद वनस्पति और वन्यजीवों को सहारा देती हैं। आवासों का स्वरूप छोटे क्षेत्र में पानी, ऊँचाई, खुलाव और भूजल की स्थितियों में तेज बदलाव के कारण मोज़ेक जैसा है। इनमें रेगिस्तान, घास और झाड़ी वाली स्टेपी, ऊँचाई के जंगल, डूम ताड़ के क्षेत्र, टाइफ़ा आर्द्रभूमि, खारे और मीठे पानी की आर्द्रभूमि, मैंग्रोव, उथले समुद्री जल, प्रवाल भित्तियाँ और समुद्री घास के मैदान शामिल हैं। डे और माबला के जंगल, डोदा, अंदाब्बा और मदगूल, अल्लोल, मोंट अरे, अली-सबीह, लाक आबे के पास गोबाआद, कालो, हान्ले-गलाफी, गाग्गाए-डेर एला और बाब-अल-मंदेब तट ऐसे दस्तावेज़ित क्षेत्र हैं जिनका पारिस्थितिक महत्व विशेष है। संरक्षित प्राकृतिक क्षेत्रों में डे, माबला, लाक आबे, लाक अस्सल, जालेलो और अस्सामो शामिल हैं। तटीय और समुद्री संरक्षण में हरामूस-लोयादा Ramsar स्थल है, जो अंतरराष्ट्रीय रूप से मान्यता प्राप्त 3,000 हेक्टेयर की आर्द्रभूमि है; 500 हेक्टेयर का मूशा-मास्काली पूर्ण संरक्षित क्षेत्र (Réserve Intégrale); और सेप्ट फ़्रेर, रास स्यान, खोर अंगार तथा गोडोरिया क्षेत्र शामिल हैं, जो लगभग 16,000 हेक्टेयर भूमि और 4,000 हेक्टेयर समुद्र में फैला है। इस क्षेत्र में दस्तावेज़ित मैंग्रोव, समुद्री घास और प्रवाल आवास हैं। छठी राष्ट्रीय रिपोर्ट के अनुसार स्थलीय संरक्षित क्षेत्र लगभग 34,400 हेक्टेयर, यानी राष्ट्रीय भूभाग का करीब 1.6 प्रतिशत है। इन आँकड़ों और स्थलों की सीमाओं को सावधानी से देखें, क्योंकि मौजूदा क्षेत्रों का कानूनी पुनर्वर्गीकरण अभी लंबित है। कानून Loi n°16/AN/23/9ème L, 17 अप्रैल 2025 को लागू हुआ और उसने पहले के Loi n°45/AN/04 को निरस्त किया। इसमें parc naturel, réserve biologique, réserve naturelle और site naturel जैसी श्रेणियाँ हैं तथा सार्वजनिक, मिश्रित और स्वीकृत निजी संरक्षित क्षेत्र बनाने की अनुमति है। पुराने संरक्षित क्षेत्रों (Aires Protégées) को लागू नियमों के तहत नई श्रेणियों में स्थानांतरित करना बाकी है। Ramsar, जैवमंडल और विश्व धरोहर के दर्जों को कानूनी संरक्षण मिलना है। पर्यावरण और सतत विकास मंत्रालय (Ministère de l'Environnement et du Développement Durable; MEDD) पर्यावरण नीति का नेतृत्व करता है। इसका पर्यावरण निदेशालय और पारिस्थितिकी तथा प्रकृति संरक्षण उपनिदेशालय स्थानीय अधिकारियों, समुदायों, मत्स्य निदेशालय, पर्यावरण अधिकारियों, पर्यटन कार्यालय और जिबूती अध्ययन एवं अनुसंधान केंद्र (Centre d'Études et de Recherche de Djibouti; CERD) के साथ काम करते हैं। लोग प्राकृतिक क्षेत्रों का उपयोग घुमंतू पशुपालन और चराई, स्थानीय मछली पकड़ने, मैंग्रोव और लकड़ी के उपयोग, तटीय और मरुद्यान खेती, लाक अस्सल में नमक उत्पादन, शोध और पारिस्थितिक पर्यटन के लिए करते हैं। पर्यटन गतिविधियों में डे और गोदा, माबला, लाक आबे और लाक अस्सल क्षेत्रों में पैदल यात्रा तथा वन्यजीव अवलोकन; और गोडोरिया तथा खोर अंगार के आसपास नाव यात्रा, गोताखोरी और मैंग्रोव भ्रमण शामिल हो सकते हैं। दूरस्थ स्थलों तक पहुँचने के लिए नाव या कठिन रास्तों की जरूरत हो सकती है और पहुँच की स्थितियाँ स्थल तथा मौसम के अनुसार बदलती हैं। संरक्षित क्षेत्रों में आवाजाही, शिविर और 1,000 मीटर से नीचे उड़ान के लिए अनुमति लग सकती है। गोताखोरी, शोध, नमूना संग्रह, फिल्मांकन और अन्य गतिविधियों के लिए भी अनुमति लग सकती है। संरक्षित क्षेत्र शिकार, मछली पकड़ने, जानवर पकड़ने, पौधे हटाने, प्रजातियाँ लाने, सामग्री निकालने, निर्माण, पानी लेने और भू-दृश्य बदलने जैसी गतिविधियों पर रोक या प्रतिबंध लगाते हैं। स्थानीय समुदायों के लिए आवश्यक घरेलू या पारंपरिक जरूरतों की गैर-व्यावसायिक सामग्री-संग्रह प्रबंधन समझौते के तहत संभव हो सकता है। मैंग्रोव काटने सहित पेड़ काटने के लिए लिखित अनुमति जरूरी है। वन्यजीवों का शिकार, पकड़ना और व्यापार देशभर में प्रतिबंधित है; पानी के भीतर शिकार, प्रवाल का व्यापार या निर्यात और सीपियाँ इकट्ठा करना भी प्रतिबंधित है। कचरा, आग, अवैध चराई, बिना अनुमति मछली पकड़ना, गोताखोरी, शोध और फिल्मांकन दंड का कारण बन सकते हैं। जल और समुद्री प्रदूषण, हानिकारक निकासी और जहाज़ के गिट्टी-पानी का छोड़ा जाना प्रतिबंधित है; विदेशी जलीय प्रजातियाँ लाने के लिए मंत्री की मंजूरी चाहिए। जिबूती में स्थानीय या क्षेत्रीय संरक्षण-चिंता वाली प्रजातियाँ हैं। उदाहरणों में जिबूती फ्रैंकोलिन, Pternistis ochropectus; जिबूती सनबर्ड; पीले चेहरे वाली Pytilia melba flavicaudata; Livistona carinensis; Juniperus procera; Dracaena ombet और Olea africana शामिल हैं। अन्य दर्ज स्तनधारियों में तेंदुआ, एबिसिनियाई जेनेट, अफ़्रीकी लंबी-कान वाला चमगादड़, क्लिपस्प्रिंगर, बेइरा, सोमरिंग गज़ेल, जिराफ़ गज़ेल और साल्ट डिक-डिक शामिल हैं। समुद्री जीवों में डुगोंग, हरे कछुए, लॉगरहेड कछुए, लेदरबैक कछुए, डॉल्फ़िन और व्हेल हैं। जिबूती के जलक्षेत्र में लगभग 167 प्रवाल प्रजातियों और 454 मछली प्रजातियों के दस्तावेज़ित रिकॉर्ड हैं। प्रकृति पर दबाव में अत्यधिक चराई, लकड़ी और मैंग्रोव काटना, रेत निकालना, जलस्रोतों और बस्तियों के आसपास बढ़ता दबाव, शार्क और कछुओं का अवैध शिकार, शहरी तथा बंदरगाह प्रदूषण, जहाज़रानी, अनियंत्रित पर्यटन, भित्तियों पर लंगर डालना और चलना तथा प्रवाल संग्रह शामिल हैं। आक्रामक प्रजातियाँ Corvus splendens और Prosopis chilensis भी पारिस्थितिक दबाव पैदा करती हैं। छठी राष्ट्रीय रिपोर्ट के मुताबिक तट के 49 प्रतिशत हिस्से में क्रमिक बाढ़ का जोखिम ऊँचा या बहुत ऊँचा है और आकलित क्षेत्रों के 48 प्रतिशत में पारिस्थितिक तंत्र बाधित होने का जोखिम ऊँचा या बहुत ऊँचा है। समुद्री आवास विशेष दबाव में हैं: आकलित 49 समुद्री आवासों में से किसी को भी अच्छी तरह संरक्षित नहीं माना गया; सात गंभीर रूप से संकटग्रस्त, 21 संकटग्रस्त और पाँच असुरक्षित थे। ये आकलन मुख्यतः 2017–2019 के आँकड़ों पर आधारित हैं और वर्तमान की पूर्ण राष्ट्रीय सूची नहीं हैं। अत्यधिक गर्मी, सूखा, जल-संकट और मरुस्थलीकरण भूमि और मीठे पानी के तंत्रों को प्रभावित करते हैं। तेज वर्षा वादियों में अचानक बाढ़ ला सकती है। तटीय कटाव, समुद्र-स्तर में वृद्धि और खारे पानी का प्रवेश तटों, आर्द्रभूमियों और भूजल को खतरे में डालते हैं। अस्सल-घोब्बेत दरार घाटी में भूकंप और ज्वालामुखीय गतिविधि प्रासंगिक हैं; अर्दूकूबा में आखिरी विस्फोट 1978 में हुआ। ये प्राकृतिक खतरे जिबूती के पर्यावरण का हिस्सा हैं; आपात योजना और आपदा प्रतिक्रिया अलग विषय हैं। पर्यावरण शिक्षा और शोध MEDD की औपचारिक जिम्मेदारियाँ हैं। दस्तावेज़ित गतिविधियाँ खोर-अंगार और अतर-दामेरजोग के मैंग्रोव, गोदा और माबला के जंगल, प्रवाल भित्तियों, पानी और मिट्टी से संबंधित हैं। réserve naturelle केवल शोध और पर्यावरण शिक्षा के लिए समर्पित हो सकता है; CERD वैज्ञानिक संग्रह की निगरानी में भाग लेता है। संरक्षित क्षेत्र की प्रबंधन योजना भौतिक, जैविक और सामाजिक-आर्थिक जानकारी, संकेतक और वित्तपोषण समेटती है और अधिकतम दस वर्षों तक लागू रह सकती है। नया संरक्षित क्षेत्र बनाने में किसी व्यक्ति या संगठन का आवेदन, तीन महीने का सार्वजनिक परामर्श और डिक्री से पहले छह महीने तक की प्रशासनिक समीक्षा शामिल हो सकती है। निजी भूमि को स्वीकृत निजी संरक्षित क्षेत्र के रूप में प्रस्तावित किया जा सकता है। देशभर में प्रवेश शुल्क या परमिट की विश्वसनीय सूची उपलब्ध नहीं है। प्रतिनिधि अनुबंध में शुल्क का प्रावधान हो सकता है, इसलिए संबंधित प्राधिकरण या स्थानीय सेवा-प्रदाता से विशिष्ट स्थल की मौजूदा लागत, अनुमति और पहुँच की स्थितियाँ पूछें। जिबूती की प्रकृति व्यवस्था कामकाज के स्तर पर स्थापित है, लेकिन संस्थागत रूप से बिखरी हुई है: स्थानीय समकक्ष संस्थाएँ और संरक्षित स्थल मौजूद हैं, जबकि व्यावहारिक कवरेज और कानूनी वर्गीकरण समान नहीं हैं। डे वन के लिए GEF परियोजना 2024 में स्वीकृत हुई और MEDD तथा UNDP इसे लागू कर रहे हैं; मौजूदा प्रमाण के बिना इसके संरक्षण नतीजों को मापा हुआ परिणाम न मानें।
जिबूती में प्रकृति
जिबूती का प्राकृतिक परिवेश अफ़ार दरार घाटी के रेगिस्तान, बेसाल्ट ज्वालामुखीय क्षेत्रों और नमक-अवसादों से लेकर ऊँचे इलाकों के जंगलों, मौसमी जलधाराओं, मैंग्रोव, प्रवाल भित्तियों और समुद्री घास के मैदानों तक फैला है। यहाँ पशुपालन, मछली पकड़ने, नमक उत्पादन, खेती, शोध और प्रकृति पर्यटन के साथ संरक्षित क्षेत्रों का प्रबंधन भी होता है। अत्यधिक गर्मी, सूखा, अचानक बाढ़, तटीय बदलाव और आवासों पर दबाव इन स्थानों के उपयोग और संरक्षण को प्रभावित करते हैं।
सुझाव
जिबूती के प्राकृतिक क्षेत्रों में हर यात्रा, उपयोग या परियोजना को स्थल-विशिष्ट मानें, क्योंकि संरक्षण श्रेणी, अनुमति, शुल्क और पहुँच की स्थितियाँ अलग हो सकती हैं। यात्रा, सामग्री संग्रह, फिल्मांकन, गोताखोरी, चराई, मछली पकड़ने या शोध से पहले जिम्मेदार प्राधिकरण से मौजूदा स्थिति की पुष्टि करें। दूरस्थ क्षेत्रों में पानी, परिवहन और गर्मी से सुरक्षा की योजना बनाएँ और अपना उद्देश्य पूरा करने वाली सबसे कम नुकसानदेह गतिविधि चुनें।

