यूरोपीय उपनिवेशवाद से पहले ताइनो लोग जमैका में रहते थे। उन्होंने पूरे द्वीप में समुदाय, खेती की पद्धतियाँ और व्यापार के नेटवर्क विकसित किए। क्रिस्टोफर कोलंबस 1494 में जमैका पहुँचे और इसके बाद स्पेनी शासन शुरू हुआ। ब्रिटेन ने 1655 में द्वीप पर कब्ज़ा किया और गन्ने के बागानों का विस्तार किया, जिनमें मुख्यतः गुलाम बनाए गए अफ्रीकियों से काम कराया जाता था। इससे जबरन श्रम पर आधारित औपनिवेशिक अर्थव्यवस्था बनी और जमैका अटलांटिक व्यापार से जुड़ा; साथ ही, आबादी, समाज और अर्थव्यवस्था में लंबे समय तक रहने वाली असमानताएँ पैदा हुईं। गुलाम बनाए गए लोगों ने रोज़मर्रा के विरोध, विद्रोहों और स्वतंत्र मैरून समुदायों के निर्माण के ज़रिए प्रतिरोध किया। मैरून (Maroon) उन अफ्रीकियों के वंशज हैं जो गुलामी से भाग निकले और उन्होंने खास तौर पर द्वीप के पहाड़ी इलाकों में स्वायत्त बस्तियों की रक्षा की। ब्रिटेन ने 1830 के दशक में कानून बनाकर गुलामी समाप्त की; 1838 में प्रशिक्षुता अवधि के बाद पूर्ण मुक्ति मिली। स्वतंत्रता मिलने से भूमि का समान स्वामित्व या राजनीतिक शक्ति तुरंत नहीं आई, और पहले गुलाम बनाए गए अनेक कामगार आर्थिक रूप से बागानों पर निर्भर रहे। बाद में जमैका एक ब्रिटिश क्राउन कॉलोनी के रूप में विकसित हुआ, जहाँ राजनीतिक संस्थाओं ने धीरे-धीरे अधिक लोगों की भागीदारी की अनुमति दी। श्रम विवादों, आर्थिक कठिनाइयों और राजनीतिक आंदोलनों ने संवैधानिक सुधार और स्वशासन को बढ़ावा दिया। जमैका 6 अगस्त 1962 को स्वतंत्र हुआ। देश ने वेस्टमिंस्टर संसदीय मॉडल बरकरार रखा, लेकिन स्वतंत्रता के साथ संप्रभुता जमैका को मिली और राज्य का शासन चलाने की ज़िम्मेदारी राष्ट्रीय संस्थाओं की हो गई। इतिहास को समझने के लिए अलग-अलग प्रकार के साक्ष्यों की तुलना करनी पड़ती है, जिनमें पुरातात्त्विक अवशेष, मौखिक परंपराएँ, बागान के अभिलेख, अदालत के दस्तावेज़, समाचारपत्र, राजनीतिक भाषण और व्यक्तिगत विवरण शामिल हैं। ये स्रोत एक ही दृष्टिकोण प्रस्तुत नहीं करते। इसलिए उपनिवेशवाद, गुलामी, प्रतिरोध, मुक्ति और स्वतंत्रता के विवरणों की तुलना करनी चाहिए, विशेषकर तब जब आधिकारिक अभिलेखों में मूलनिवासी लोगों, गुलाम बनाए गए अफ्रीकियों, मैरून समुदायों, कामगारों और ग्रामीण समुदायों के अनुभव कम दर्ज हों।
जमैका का इतिहास
जमैका का इतिहास ताइनो समाज, स्पेनी और ब्रिटिश उपनिवेशवाद, अफ्रीकियों की दासता, प्रतिरोध, मुक्ति और स्वतंत्रता से आकार लेता रहा है। ब्रिटिश बागान शासन ने द्वीप की आबादी, अर्थव्यवस्था और राजनीतिक संस्थाओं को बदल दिया। 6 अगस्त 1962 को जमैका यूनाइटेड किंगडम से स्वतंत्र हुआ, लेकिन उसने औपनिवेशिक काल से मिली कई संस्थाएँ बरकरार रखीं।
सुझाव
जमैका के इतिहास को अलग-अलग घटनाओं की सूची की तरह नहीं, बल्कि सत्ता, श्रम, आबादी और संस्थाओं में आए बदलावों की तारीखवार क्रम-श्रृंखला की तरह देखें। किसी विवरण का आकलन करते समय तुलना करें कि साक्ष्य किसने बनाया, उसमें किसके अनुभव दर्ज हैं, और कानून में बदलाव से रोज़मर्रा के जीवन में क्या बदला।

