परिचित वह व्यक्ति है जिसे कोई जानता तो है, लेकिन अभी गहराई से नहीं। संबंध सामाजिक, पेशेवर, व्यावहारिक या किसी साझा जगह से जुड़ा हो सकता है। घाना में नए संपर्क अक्सर रिश्तेदारों, दोस्तों, सहकर्मियों, पड़ोसियों, धार्मिक समुदायों, स्कूलों, बाज़ारों और स्थानीय कार्यक्रमों के माध्यम से बनते हैं। किसी साझा परिचित का परिचय उपयोगी संदर्भ दे सकता है। काम की बात या अनुरोध से पहले अभिवादन आम तौर पर किया जाता है। किसी का हाल संक्षेप में पूछना शिष्टाचार दिखा सकता है और बातचीत को सहज बना सकता है। नाम, पदवी, पेशा, गृहनगर, स्कूल और पारिवारिक संबंध लोगों को यह समझने में मदद कर सकते हैं कि वे एक-दूसरे से कैसे जुड़े हैं। फिर भी ऐसे सवालों में निजता का सम्मान करना चाहिए। परिचित लोग स्थानीय जानकारी, अवसर, परिचय और व्यावहारिक मदद साझा कर सकते हैं। समय के साथ बार-बार भरोसेमंद संपर्क से दोस्ती या पेशेवर सहयोग विकसित हो सकता है। गर्मजोशी भरी बातचीत से यह साबित नहीं होता कि कोई व्यक्ति भरोसेमंद है। संवेदनशील दस्तावेज़, पासवर्ड, अंतरंग जानकारी और बड़ी वित्तीय प्रतिबद्धताओं के मामले में सावधानी ज़रूरी है। सामाजिक सीमाएँ अलग-अलग होती हैं। कुछ लोगों को बार-बार फ़ोन और निजी सवाल पसंद आते हैं, जबकि कुछ सीमित संपर्क या लिखित संवाद पसंद करते हैं। परिचितों का उपयोगी संबंध सम्मानजनक होता है और उसका उद्देश्य स्पष्ट होता है। दोनों में से कोई भी व्यक्ति आगे संपर्क से इनकार कर सकता है; उसे निकटता बनाए रखने की बाध्यता नहीं है।
घाना में परिचित लोग
घाना में परिचय पड़ोस, स्कूलों, कार्यस्थलों, बाज़ारों, परिवहन, आस्था-समुदायों और सामाजिक कार्यक्रमों के ज़रिये हो सकता है। शिष्ट अभिवादन और परिचय आगे संपर्क का रास्ता खोलते हैं। परिचित होने को गहरे भरोसे के बराबर न समझें, खासकर पैसों या निजी जानकारी के मामले में।
सुझाव
अपना संक्षिप्त परिचय दें, बताएँ कि आप उस जगह से कैसे जुड़े हैं और दूसरे व्यक्ति को उसके पसंदीदा नाम से याद रखें। बार-बार जाँचे जा सकने वाले व्यवहार से भरोसा बनने दें। शुरुआती बातचीत मैत्रीपूर्ण रखें और निजी जानकारी तथा पैसों की रक्षा करें।

