केप वर्डे ज्वालामुखीय द्वीपसमूह है और इसका लिखित इतिहास पुर्तगाली समुद्री विस्तार से शुरू होता है। आधिकारिक पुर्तगाली स्रोत पुर्तगाली नाविकों के आगमन की तारीख मई 1460 बताते हैं। समीक्षा किए गए स्रोतों में इससे पहले मानव उपस्थिति का सत्यापित साक्ष्य नहीं मिला; यह स्रोतों की कमी है, इस बात का प्रमाण नहीं कि पहले कोई आगंतुक नहीं आया। सैंटियागो पर बसावट 1462 में शुरू हुई और पंद्रहवीं सदी के आखिर में रिबेरा ग्रांडे, जिसे बाद में सिदादे वेल्हा के नाम से जाना गया, की स्थापना हुई। यह उष्णकटिबंधीय क्षेत्र का पहला यूरोपीय औपनिवेशिक नगर और यूरोप, पश्चिम अफ्रीका, ब्राज़ील तथा कैरिबियाई क्षेत्र को जोड़ने वाला अटलांटिक व्यापार केंद्र बना। इसका विकास औपनिवेशिक कृषि, पौधों के अनुकूलन, अफ्रीकी लोगों की तस्करी और दासता तथा क्रियोल समाज के गठन पर निर्भर था। सोलहवीं और सत्रहवीं सदी में रिबेरा ग्रांडे पुर्तगाली औपनिवेशिक बंदरगाह और प्रशासनिक केंद्र था। उसकी स्थिति दास व्यापार की रसद और सांस्कृतिक आदान-प्रदान में मदद करती थी। अठारहवीं सदी में रिबेरा ग्रांडे के कमजोर होने के साथ प्राया का विस्तार हुआ। बेहतर बंदरगाह, रक्षा स्थिति और स्वास्थ्य दशाओं के कारण 1770 में प्राया राजधानी बना। समुद्री डकैती और निजी जहाजों के हमलों ने भी द्वीपों को प्रभावित किया। अठारहवीं सदी के अंत में रिबेरा ग्रांडे का नाम बदलकर सिदादे वेल्हा कर दिया गया। उन्नीसवीं सदी में दासता से दूर जाने का बदलाव आया। Instituto do Arquivo Nacional de Cabo Verde, जिसे Arquivo Nacional de Cabo Verde भी कहा जाता है, के रिकॉर्ड में 1842 से 1869 की फाइलें, स्वतंत्रता-पत्र और 1842 में स्थापित बोआ विस्टा के लुसो-ब्रिटिश संयुक्त आयोग के रिकॉर्ड शामिल हैं। 1854 में पुर्तगाली दास जनगणना का आदेश आया और 1869 में पुर्तगाली क्षेत्र में दासता समाप्त हुई। जलवायु बिगड़ने, सूखे और अकाल ने जीवन-निर्वाह पर दबाव डाला, द्वीपों के बीच आवाजाही बढ़ाई और प्रवासन को प्रोत्साहित किया। फोगो और ब्रावा के इतिहास में अमेरिका के व्हेलिंग उद्योग और व्यापक केप वर्डे प्रवासी समुदाय से जुड़े प्रवासन भी शामिल हैं। बीसवीं सदी के पुर्तगाली शासन में देशज और राष्ट्रवादी धाराएं बढ़ीं। Amílcar Cabral ने 1956 में गिनी और केप वर्डे की स्वतंत्रता के लिए अफ्रीकी पार्टी, यानी PAIGC, की स्थापना की। PAIGC और पुर्तगाल के बीच 19 दिसंबर 1974 का समझौता सत्ता हस्तांतरण की तैयारी था। केप वर्डे 5 जुलाई 1975 को स्वतंत्र हुआ और संप्रभुता Assembleia Constituinte को सौंपी गई। 1975 से 1990 तक PAIGC और बाद में केप वर्डे की स्वतंत्रता के लिए अफ्रीकी पार्टी, यानी PAICV, एक-दलीय संवैधानिक व्यवस्था में शासन करती रही। पहला संविधान 1980 में अपनाया गया। गिनी-बिसाऊ में 1980 के तख्तापलट के बाद उसके साथ प्रस्तावित राजनीतिक संघ समाप्त हो गया। 1990 में संवैधानिक बहुलवाद ने एक-दलीय संवैधानिक आधार की जगह ली। पहला बहुदलीय विधायी चुनाव 13 जनवरी 1991 को हुआ और मूवमेंट फॉर डेमोक्रेसी, यानी MpD, जीता। फरवरी 1991 में राष्ट्रपति चुनाव हुआ। नया संविधान 5 अगस्त 1992 को स्वीकृत हुआ और 25 सितंबर 1992 को लागू हुआ। PAICV 2001 में फिर सत्ता में लौटी, जिससे दूसरी लोकतांत्रिक सत्ता-बदल हुई। सिदादे वेल्हा को 2009 में UNESCO विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया। केप वर्डे में ऐतिहासिक शोध के लिए कोई एक जिम्मेदार प्राधिकरण नहीं है। Instituto do Arquivo Nacional de Cabo Verde, Biblioteca Nacional, Universidade de Cabo Verde, विरासत प्राधिकरण और UNESCO साक्ष्य या व्याख्या के अलग-अलग रूपों में योगदान देते हैं। राष्ट्रीय अभिलेखागार अपने ATOM सिस्टम के जरिए डिजिटल सूची देता है; अभिलेखागार के नियमों के अधीन पढ़ने और शोध की सुविधा भी देता है। साक्ष्य के अनुसार 18 अप्रैल, 18 मई और 18 अक्टूबर को सार्वजनिक भ्रमण मुफ्त हैं; अन्य शुल्क और प्रतीक्षा अवधि संस्था तथा मौजूदा व्यवस्था पर निर्भर करते हैं। व्याख्या स्रोत और स्मृति समुदाय के अनुसार बदलती है। औपनिवेशिक प्रशासनिक रिकॉर्ड में पुर्तगाली शासन, दासता और व्यापार को प्रमुखता मिलती है। UNESCO सिदादे वेल्हा को उपनिवेशवाद, दासता और क्रियोल अटलांटिक से जुड़ी जगह के रूप में पेश करता है। राष्ट्रीय मुक्ति की कथाएं Cabral, PAIGC और 1975 की स्वतंत्रता पर केंद्रित हैं। Universidade de Cabo Verde के शोध से पता चलता है कि 1975 से 1990 की अवधि को देश के राष्ट्रीय जन्म के रूप में और बाद की उपनिवेशवाद-विरोधी, आलोचनात्मक तथा बहुल व्याख्याओं के जरिए याद किया जाता है। इसलिए औपनिवेशिक रिकॉर्ड की स्रोत-आलोचना जरूरी है, जबकि प्रवासी समुदाय की गवाही और मौखिक स्मृति उन दृष्टिकोणों को जोड़ सकती है जिन्हें लिखित अभिलेख सुरक्षित नहीं रखते। शोधकर्ताओं को हर स्रोत का अभिलेखागार, तारीख, लेखक, उद्देश्य और सीमा दर्ज करनी चाहिए।
केप वर्डे का इतिहास
केप वर्डे का इतिहास पुर्तगाली उपनिवेशवाद, अटलांटिक व्यापार, अफ्रीकी लोगों की दासता, क्रियोल समाज, प्रवासन और राष्ट्रीय मुक्ति के साथ विकसित हुआ। पुर्तगाली नाविक मई 1460 में द्वीपों तक पहुंचे, सैंटियागो पर बसावट 1462 में शुरू हुई और रिबेरा ग्रांडे, जिसे बाद में सिदादे वेल्हा कहा गया, अटलांटिक का प्रमुख बंदरगाह बना। 5 जुलाई 1975 को स्वतंत्रता मिली; संवैधानिक बहुलवाद और बहुदलीय लोकतंत्र 1990 से विकसित हुए।
सुझाव
एक सटीक ऐतिहासिक सवाल से शुरुआत करें और ऐसे स्रोत चुनें जो उसका जवाब दे सकें। अभिलेखीय रिकॉर्ड को विश्वविद्यालय के शोध, विरासत सामग्री और मौखिक या प्रवासी स्मृति के साथ मिलाएं, क्योंकि कोई एक संस्था केप वर्डे के अतीत का पूरा विवरण नहीं देती। निष्कर्ष निकालने से पहले हर स्रोत की उत्पत्ति और सीमाएं दर्ज करें।

