किरिबाती 32 एटोल और एक ऊँचे प्रवाल द्वीप से बना है। इसका स्थल क्षेत्र लगभग 811 वर्ग किलोमीटर और अनन्य आर्थिक क्षेत्र लगभग 35 लाख वर्ग किलोमीटर है। अधिकांश आबाद भूमि औसत समुद्र-स्तर से तीन मीटर से कम ऊँची है। कई बस्तियाँ समुद्र और लैगून के बीच बदलती संकरी पट्टियों पर हैं। दक्षिण तारावा बेटियो, बैरिकी, बिकेनिबेउ और बुओटा सहित स्थानों से होकर एक शहरी गलियारा बनाता है। वहाँ जनघनत्व, भीड़ और सड़कों, कॉज़वे, बंदरगाह, हवाई पट्टी, बिजली, दूरसंचार, पानी तथा स्वच्छता पर दबाव अधिकांश बाहरी द्वीपों से अधिक है। बाहरी द्वीपों पर सेवाओं का दायरा आम तौर पर कम है और वे द्वीप परिषदों, समुदायों तथा अलग-अलग परियोजनाओं पर अधिक निर्भर हैं। तीन शहरी परिषदें और 20 द्वीप परिषदें मिलकर 23 परिषदें बनाती हैं। स्थानीय सरकार प्रभाग उनका समर्थन करता है; आधारभूत संरचना और सतत ऊर्जा मंत्रालय अपने सिविल इंजीनियरिंग विभाग तथा जल एवं स्वच्छता इंजीनियरिंग प्रभाग के माध्यम से जिम्मेदारी निभाता है। पर्यावरण, भूमि और कृषि विकास मंत्रालय के विशेष विभाग भूमि-योजना, पर्यावरण संरक्षण और कचरे के मामलों को संभालते हैं। सार्वजनिक उपयोगिता बोर्ड अपने निर्धारित दक्षिण तारावा सेवा क्षेत्र में बिजली, पानी और सीवरेज देता है। ये जिम्मेदारियाँ पूरे देश के लिए एक परिवेश कार्यालय नहीं बनातीं; संबंधित निकाय द्वीप, परिषद, सेवा और परियोजना पर निर्भर है। भूमि-उपयोग, विकास, तटभूमि, समुद्री दीवार, भूमि-पुनर्प्राप्ति और प्लेटफ़ॉर्म प्रस्तावों में भूमि योजना और विकास अनुभाग तथा केंद्रीय या स्थानीय भूमि योजना बोर्ड शामिल हो सकते हैं। पर्यावरण अधिनियम 2021 संबंधित परियोजना शुरू होने से पहले उसके संभावित पर्यावरणीय प्रभावों की जाँच के लिए पर्यावरणीय प्रभाव आकलन का प्रावधान करता है। इसमें जनता की राय और शर्तों वाले पर्यावरण लाइसेंस का भी प्रावधान है। इसलिए कानून लागू होने पर समुद्री दीवारों और कॉज़वे की पर्यावरणीय समीक्षा जरूरी है। कठोर तटीय संरचना एक किनारे की रक्षा करके कहीं और कटाव बढ़ा सकती है; इसलिए संरक्षण, अनुकूलन, भूमि ऊँची करना, पीछे हटने की दूरी और संभावित स्थानांतरण में अलग-अलग खर्च और जोखिम हैं। स्थानांतरण या आवागमन अनुकूलन का विकल्प हो सकता है, लेकिन इससे अपने-आप कोई अधिकार नहीं मिलता। मीठे पानी की परतें प्रवाल द्वीपों के नीचे मौजूद भूमिगत मीठे पानी के भंडार हैं। किरिबाती इन परतों, बोरहोल, वर्षा-जल संग्रह और टैंकों, विलवणीकरण तथा परियोजना-आधारित प्रणालियों पर निर्भर करता है। दक्षिण तारावा की मीठे पानी की परतें खारेपन, अत्यधिक दोहन, सूखे, बाढ़ और कचरे या सीवेज से प्रदूषण के जोखिम में हैं। बोनरिकी और बुओटा के आरक्षित क्षेत्र संरक्षित और प्रबंधित हैं। मैकेंज़ी विलवणीकरण संयंत्र 14 अप्रैल 2025 को चालू हुआ; इसकी क्षमता प्रतिदिन 2,500 घन मीटर है। प्रतिदिन 3,500 घन मीटर क्षमता वाले बेटियो संयंत्र को चालू करने में देरी हुई है और अब 2028 का लक्ष्य है। बाहरी द्वीपों पर भी सौर जल-वितरण तथा विलवणीकरण परियोजनाएँ हैं, लेकिन कनेक्शन, शुल्क, मरम्मत और सेवा की उपलब्धता हर द्वीप और परियोजना पर निर्भर है। दक्षिण तारावा में सेप्टिक टैंक, गड्ढे, सामुदायिक प्रणाली और PUB सीवरेज का उपयोग होता है। सीवरेज बड़े गाँवों में उपलब्ध है; दक्षिण तारावा स्वच्छता परियोजना सामुदायिक शौचालय, मल-कीचड़ और सीवरेज सुधार तथा जल, स्वच्छता और साफ-सफाई जागरूकता में मदद करती है। बाहरी द्वीपों पर स्वच्छता की पहुँच अधिक बिखरी हुई है; देशभर में घरेलू कनेक्शन, शुल्क या सेवा-समय की एक समान व्यवस्था स्थापित नहीं है। खराब स्वच्छता भूमिगत जल को दूषित कर सकती है और जलजनित रोगों का खतरा बढ़ाती है। पर्यावरण और संरक्षण प्रभाग तथा उसकी रासायनिक एवं अपशिष्ट प्रबंधन इकाई ठोस और खतरनाक कचरे, प्रदूषण निगरानी तथा प्रवर्तन पर काम करती है। किरिबाती अपशिष्ट प्रबंधन और संसाधन पुनर्प्राप्ति रणनीति 2020–2029 इसका मार्गदर्शन करती है। खासकर दक्षिण तारावा में संग्रह और निपटान क्षमता, कूड़ा, प्लास्टिक, समुद्री मलबा और कचरा जलाना व्यावहारिक चिंताएँ हैं। बाहरी द्वीपों पर पुनर्प्राप्ति और संग्रह अक्सर परिषद, समुदाय या परियोजना के माध्यम से होते हैं; सार्वभौमिक पुनर्चक्रण सुविधा या एकसमान शुल्क की पुष्टि नहीं है। यातायात, जनरेटर, निर्माण, धूल, कचरा जलाना तथा बंदरगाह या समुद्री गतिविधि वायु गुणवत्ता और शोर को प्रभावित कर सकते हैं। किरिबाती में पूरे देश के लिए मजबूत परिवेशी-वायु या शोर निगरानी आधाररेखा अथवा जर्मनी जैसी पड़ोस-शिकायत संस्था की पुष्टि नहीं है। स्थलीय खुली जगह सीमित है, लेकिन तटीय वनस्पति, मैंग्रोव, घर और समुदाय के बगीचे, लैगून तथा समुद्र छाया, मनोरंजन, बाढ़ से बचाव और रोज़मर्रा के उपयोग के स्थान देते हैं। पर्यावरण, भूमि और कृषि विकास मंत्रालय संरक्षित क्षेत्रों का प्रबंधन करता है; इनमें फीनिक्स द्वीप संरक्षित क्षेत्र और दूसरे समुद्री या संरक्षण क्षेत्र शामिल हैं। स्थानीय समुदाय तथा द्वीप परिषदें प्रथागत या सामुदायिक संरक्षण में भी मदद करती हैं। जैव-विविधता मुख्यतः प्रकृति-संरक्षण का विषय है; यहाँ यह तब प्रासंगिक है जब पहुँच, सुरक्षा और रोज़मर्रा के उपयोग पर असर पड़ता हो। तटीय बाढ़, कटाव, किंग टाइड, तूफ़ानी ज्वार, खारे पानी का प्रवेश, सूखा, समुद्र-स्तर में वृद्धि, समुद्र का गर्म होना और अम्लीकरण रोज़मर्रा की सुरक्षा तथा बुनियादी ढाँचे को प्रभावित करते हैं। राष्ट्रीय आपदा अधिनियम, राष्ट्रीय आपदा जोखिम प्रबंधन योजना और किरिबाती राष्ट्रीय विशेषज्ञ समूह तैयारी का समन्वय करते हैं; परिषदें और सामुदायिक संरचनाएँ स्थानीय कार्रवाई में मदद करती हैं। चेतावनी, निकासी, आश्रय और प्रतिक्रिया क्षमता अलग-अलग है, क्योंकि दूरसंचार, सड़कें, सार्वजनिक भवन, पानी और बिजली की प्रणालियाँ समान रूप से आपदा-सहनशील नहीं हैं। पर्यावरणीय प्रभाव आकलन और परियोजनाओं की हितधारक सहभागिता योजना में परिषद, मानेआबा और सामुदायिक शासन, गैर-सरकारी संगठन, महिला, युवा और मछुआरा समूह शामिल हो सकते हैं। भागीदारी से परामर्श या क्रियान्वयन का रास्ता मिलता है, अपने-आप वीटो या संपत्ति-अधिकार नहीं। परिवेश के सभी मामलों के लिए कोई एक राष्ट्रीय शुल्क, पात्रता नियम, सेवा-अवधि या शिकायत प्रक्रिया नहीं है। व्यावहारिक पूछताछ में पहले द्वीप और परिषद पहचानें, फिर आधारभूत संरचना और सतत ऊर्जा मंत्रालय, सार्वजनिक उपयोगिता बोर्ड, पर्यावरण, भूमि और कृषि विकास मंत्रालय, स्वास्थ्य सेवा या संबंधित परियोजना इकाई से वर्तमान जिम्मेदारी की पुष्टि लें। स्थानीय उत्तर द्वीप, परिषद, परियोजना और तारीख के अनुसार बदल सकते हैं; दक्षिण तारावा की व्यवस्था बाहरी द्वीप पर अपने-आप लागू नहीं होती।
किरिबाती का परिवेश
किरिबाती में रोज़मर्रा का परिवेश संकरे, निचले द्वीपों, असमान सेवा-व्यवस्था और समुद्र, लैगून तथा मीठे पानी पर गहरी निर्भरता से प्रभावित है। दक्षिण तारावा में जनसंख्या घनत्व और बुनियादी ढाँचे पर दबाव सबसे अधिक है, जबकि बाहरी द्वीप आम तौर पर गाँव, परिषद और परियोजना-आधारित सेवाओं पर अधिक निर्भर हैं। पानी और स्वच्छता, कचरा, तटीय खतरे, सार्वजनिक सुरक्षा, हरित और जलीय स्थानों तक पहुँच तथा स्थानीय परियोजनाओं में भागीदारी मुख्य व्यावहारिक मुद्दे हैं।
सुझाव
किरिबाती में परिवेश को एक देशव्यापी प्रणाली के बजाय द्वीप और परियोजना के अनुसार बदलने वाला सेवा-मामला मानें। पानी की सुरक्षा, स्वच्छता, कचरे का प्रबंधन तथा तटीय या आपदा जोखिम को पहले देखें। खर्च करने या किसी कनेक्शन के वादे पर निर्भर होने से पहले जिम्मेदार परिषद या संस्था, मौजूदा सेवा, शुल्क और शर्तें पक्की करें। भूमि या तटीय परियोजना के लिए नियोजन मंज़ूरी, पर्यावरण समीक्षा और सामुदायिक भागीदारी का रिकॉर्ड साथ रखें, क्योंकि कठोर संरचना जोखिम को दूसरी जगह बढ़ा सकती है।

