कनाडा में कराधान के कई स्तर हैं। संघीय सरकार और प्रांत या क्षेत्र आय पर कर लगाते हैं, जबकि नगरपालिकाएँ आम तौर पर अपने प्रांत या क्षेत्र द्वारा दिए गए अधिकारों के भीतर संपत्ति करों और सेवा शुल्कों पर निर्भर रहती हैं। कनाडा में व्यक्तिगत आयकर आम तौर पर वार्षिक करयोग्य आय पर आधारित होता है। आय के अलग-अलग हिस्सों पर अलग-अलग दरें लागू हो सकती हैं, इसलिए ऊँचे कर-ब्रैकेट में जाने पर सामान्यतः पूरी आय उस ऊँची दर से करयोग्य नहीं हो जाती। नियोक्ता आम तौर पर रोजगार से मिलने वाले वेतन में से आयकर और वेतन-संबंधी अंशदान रोक लेते हैं। यह रोक वर्षभर की देनदारियों का अनुमानित भुगतान होती है और अंतिम गणना में कर बकाया या रिफंड हो सकता है। निवासी आम तौर पर कनाडाई कर नियमों के अनुसार संबंधित स्रोतों से हुई आय की रिपोर्ट करते हैं। रोजगार, स्व-रोजगार, निवेश, किराया, पेंशन और विदेशी आय का अलग-अलग उपचार हो सकता है। कटौतियाँ आम तौर पर कर-गणना में उपयोग होने वाली आय को कम करती हैं, जबकि क्रेडिट अपने नियमों के अनुसार कर की राशि को कम करते हैं। पात्रता व्यक्तिगत परिस्थितियों और सहायक अभिलेखों पर निर्भर करती है। पूरे कनाडा में बिक्री कर अलग-अलग होते हैं। संघीय वस्तु एवं सेवा कर (Goods and Services Tax) अकेले लागू हो सकता है या समेकित बिक्री कर (Harmonized Sales Tax) का हिस्सा हो सकता है, जबकि कुछ प्रांत अलग प्रांतीय बिक्री कर (provincial sales tax) का उपयोग करते हैं और अन्य की व्यवस्थाएँ अलग हैं। रिटर्न दाखिल करना तब भी महत्वपूर्ण हो सकता है जब बहुत कम या कोई आयकर देय न हो। रिटर्न की जानकारी का उपयोग आय-आधारित क्रेडिट, लाभों और कार्यक्रमों की पात्रता की गणना के लिए किया जा सकता है। करदाताओं को सही अभिलेख रखने चाहिए और आधिकारिक अनुरोधों का जवाब विश्वसनीय माध्यमों से देना चाहिए। व्यवसायों, कई देशों, संपदाओं या बड़े लेन-देन से जुड़ी जटिल परिस्थितियों में योग्य पेशेवर सहायता की आवश्यकता हो सकती है।
कर व्यवस्था कनाडा में
कनाडा में कर सार्वजनिक सेवाओं को वित्तपोषित करते हैं और संघीय, प्रांतीय या क्षेत्रीय तथा नगरपालिका सरकारों द्वारा वसूले जाते हैं। लोगों का आम तौर पर सामना आयकर, बिक्री कर, वेतन से कटौतियों और संपत्ति-संबंधी करों से होता है। आयकर रिटर्न दाखिल करने से कनाडा में क्रेडिट और लाभों की पात्रता भी निर्धारित हो सकती है।
सुझाव
पूरे वर्ष कर दस्तावेज़ों को एक साथ व्यवस्थित रखें, ताकि रिटर्न दाखिल करते समय पूरी जानकारी फिर से जुटानी न पड़े। जमा करने से पहले पूरा रिटर्न जाँचें और दावों के प्रमाण सुरक्षित रखें। रिफंड को मुफ्त धन नहीं, बल्कि लौटाए गए अतिरिक्त भुगतान या लाभ की पात्रता समझें।

