वर्तमान इज़राइल की भूमि पर अनेक लोगों और शक्तियों का निवास और शासन रहा है। पुरातत्व, धार्मिक ग्रंथ और ऐतिहासिक अभिलेख इसे प्राचीन कनानी, इस्राएली, फ़िलिस्तीनी और बाद की क्षेत्रीय सभ्यताओं से जोड़ते हैं। प्राचीन यहूदी राज्य और यरूशलम यहूदी इतिहास में केंद्रीय स्थान रखते हैं। यह क्षेत्र ईसाई धर्म की आधारभूमि भी बना और बाद में इस्लाम में अत्यंत महत्वपूर्ण हो गया। रोमन और बीज़ेंटाइन शासन ने इसके राजनीतिक और धार्मिक परिदृश्य को बदल दिया। विजय, विस्थापन और व्यापक प्रवासी समुदायों के बावजूद यहूदी समुदाय भूमि से जुड़े रहे। सातवीं शताब्दी से आगे मुस्लिम-शासित साम्राज्यों ने क्षेत्र के बड़े हिस्से को आकार दिया, जबकि मध्ययुग के एक दौर में ईसाई क्रूसेडर शासन भी रहा। अरबी भाषा और संस्कृति गहराई से जड़ें जमा गईं। प्रथम विश्व युद्ध तक कई शताब्दियों तक उस्मानी साम्राज्य ने इस क्षेत्र पर शासन किया। यहाँ अरबी-भाषी मुसलमान और ईसाई, यहूदी समुदाय तथा नगरों और ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले अन्य समूह शामिल थे। ब्रिटिश शासनादेश (British Mandate) के अधीन यहूदी प्रवासन, ज़ायनिस्ट संस्थाओं का निर्माण, फ़िलिस्तीनी अरब राजनीतिक गतिविधि और संघर्ष बढ़े। यहूदी राष्ट्रीय आत्मनिर्णय का आंदोलन (Zionism) यहूदियों के राष्ट्रीय आत्मनिर्णय की मांग करता था, जबकि फ़िलिस्तीनी अरब विस्थापन और राजनीतिक नियंत्रण खोने का विरोध करते थे। इज़राइल ने 1948 में स्वतंत्रता की घोषणा की और उसके बाद युद्ध हुआ। इस युद्ध ने नए राज्य को सुरक्षित किया, अनेक फ़िलिस्तीनियों को विस्थापित किया, सीमाओं और समुदायों को बदला तथा शरणार्थियों और स्मृति से जुड़े स्थायी प्रश्न पैदा किए। बाद के युद्ध, कब्ज़ा, शांति प्रयास, प्रवासन की लहरें और सामाजिक परिवर्तन इज़राइल और उसके पड़ोसियों को आकार देते रहे। इतिहास राजनीति, पहचान, पारिवारिक कथाओं, परिदृश्यों, त्योहारों और सार्वजनिक बहस का हिस्सा बना हुआ है। एक संतुलित अवलोकन स्थापित घटनाओं को परस्पर भिन्न व्याख्याओं से अलग करता है। यह यहूदी, फ़िलिस्तीनी, अरब, धार्मिक, धर्मनिरपेक्ष, प्रवासी और अल्पसंख्यक अनुभवों को भी सुनता है, बिना किसी समुदाय को एक ही आवाज़ मानने के।
इतिहास: इज़राइल में
इज़राइल के इतिहास में प्राचीन सभ्यताएँ, भूमि से यहूदी संबंध, अरब और फ़िलिस्तीनी इतिहास, लगातार बदलते साम्राज्य, आधुनिक राष्ट्रवाद, प्रवासन, युद्ध और राज्य-निर्माण शामिल हैं। इज़राइल राज्य की स्थापना 1948 में हुई, जिसे इज़राइली यहूदी स्वतंत्रता के रूप में याद करते हैं, जबकि फ़िलिस्तीनी इसे नकबा या तबाही के माध्यम से याद करते हैं। साझा और परस्पर विरोधी दोनों स्मृतियों को समझना आवश्यक है।
सुझाव
इज़राइल के इतिहास पर चर्चा करते समय पहले काल, स्थान और संबंधित समुदाय को स्पष्ट करें। अपेक्षा रखें कि परिचित घटनाओं के अलग-अलग नाम और भावनात्मक अर्थ हो सकते हैं। सावधानीपूर्ण भाषा का प्रयोग करें, प्रमाण और स्मृति में अंतर करें और एक से अधिक मानवीय अनुभवों के लिए स्थान रखें।

