अफ़ग़ानिस्तान में आठ जैव-भौगोलिक प्रांत और पंद्रह पारिस्थितिक क्षेत्र हैं। राष्ट्रीय जैव-विविधता रूपरेखा में इनमें से चार को गंभीर रूप से संकटग्रस्त या लुप्तप्राय और आठ को असुरक्षित वर्गीकृत किया गया है। वन और झाड़ीदार क्षेत्र का अनुमान लगभग 1.78 million hectares है, जबकि दूसरे आँकड़ों में वन क्षेत्र लगभग 1.9% बताया गया है; परिभाषाएँ और अवलोकन-वर्ष समान न होने से आँकड़े अलग हैं। चरागाह लगभग 30.2 million hectares, यानी देश के 47% हिस्से में फैले हैं और पशुओं के चारे का लगभग 75–80% देते हैं। वे आवास, ईंधन, औषधीय पौधे और अन्य प्राकृतिक उत्पाद भी उपलब्ध कराते हैं। उनकी स्थिति का असर कटाव, भूजल, नदियों और खेती तथा पशुपालन से जुड़ी आजीविकाओं की लचीलापन क्षमता पर पड़ता है। अफ़ग़ानिस्तान के प्राकृतिक भू-दृश्यों में हिंदू कुश और पामीर पर्वत, मैदान, शुष्क और अर्ध-शुष्क रेगिस्तान, अल्पाइन स्टेपी, चरागाह, नदी घाटियाँ, हिमनद, वन और वुडलैंड, झीलें तथा आर्द्रभूमियाँ शामिल हैं। बंजर भूमि के साथ चरागाह देश के लगभग 75% भूभाग में फैले हैं और इन पर बड़े पैमाने पर पशु चरते हैं। शुष्क जलवायु में आर्द्रभूमियाँ कम हैं, लेकिन जैव-विविधता के लिए उनका महत्व अधिक है। काबुल के पास कोल-ए-हशमत ख़ान लगभग 1.91 वर्ग किलोमीटर की मौसमी झील है। बंद-ए-अमीर लगभग 2,900 मीटर की ऊँचाई पर छह ट्रैवर्टीन झीलों का समूह है और प्रकृति पर्यटन का प्रमुख स्थल है। इस शोध में इस्तेमाल की गई मौजूदा रामसर सूची में अफ़ग़ानिस्तान नहीं मिला, इसलिए उसके राष्ट्रीय रामसर दर्जे की पुष्टि नहीं है। पास के हमून रामसर स्थल ईरान में हैं और उनसे अफ़ग़ान क्षेत्र अपने आप शामिल नहीं होता। अगस्त 2026 में प्रोटेक्टेड प्लैनेट और संरक्षित क्षेत्रों के विश्व डेटाबेस में पंद्रह संरक्षित क्षेत्र, प्रबंधन प्रभावशीलता के दो मूल्यांकन और कोई OECM दर्ज नहीं थे; OECM का अर्थ है क्षेत्र-आधारित संरक्षण के अन्य प्रभावी उपाय। यह वैश्विक रजिस्ट्री अपने आप किसी राष्ट्रीय राजपत्र या कानूनी रूप से पुष्ट सीमा का प्रमाण नहीं है। अफ़ग़ान पर्यावरण संबंधी स्रोतों में बंद-ए-अमीर राष्ट्रीय उद्यान, बड़े और छोटे पामीर वन्यजीव आरक्षित क्षेत्रों वाला वाख़ान राष्ट्रीय उद्यान, शाह फोलादी प्राकृतिक परिदृश्य, बामियान पठार, कोल-ए-हशमत ख़ान जलपक्षी अभयारण्य और टेगर्मांसु वन्यजीव आरक्षित क्षेत्र जैसे स्थल शामिल हैं। सूचियाँ अलग-अलग हैं; प्रत्येक स्थल की वर्तमान स्थिति और सीमा की अलग से पुष्टि आवश्यक है। वाख़ान, बंद-ए-अमीर, कोल-ए-हशमत ख़ान और शाह फोलादी के लिए प्रबंधन योजनाओं की जानकारी दी गई है। 2030 तक कम से कम 10% भूमि को संरक्षित करने का नीतिगत लक्ष्य है, लेकिन लक्ष्य यह नहीं दिखाता कि उतना क्षेत्र पहले से संरक्षित हो चुका है। राष्ट्रीय पर्यावरण संरक्षण एजेंसी, जिसे NEPA कहा जाता है, पर्यावरण संबंधी मामलों का नियमन और राष्ट्रीय नीति का समन्वय करती है। इसका प्राकृतिक विरासत निदेशालय संरक्षित क्षेत्रों, जैव-विविधता, वन्यजीव, आर्द्रभूमि और उद्यानों से जुड़ा है। कृषि, सिंचाई और पशुधन मंत्रालय वन, चरागाह और संबंधित प्राकृतिक संसाधनों का काम देखता है। प्रांतीय NEPA कार्यालय, स्थानीय समितियाँ, सामुदायिक विकास परिषदें, वन्यजीव संरक्षण संघ, वन प्रबंधन संघ और चरागाह प्रबंधन संघ भी प्रबंधन को प्रभावित कर सकते हैं। वाख़ी और किर्गिज़ समुदाय, कुची पशुपालक और अन्य स्थानीय समुदाय औपचारिक तथा समुदाय-आधारित कार्यक्रमों के साथ प्रथागत चराई, संग्रहण और स्थानीय पारिस्थितिक ज्ञान का उपयोग करते हैं। निवासियों और आगंतुकों की पहुँच के लिए देशव्यापी समान अनुमति, बुकिंग, शुल्क या मौसमी व्यवस्था की पुष्टि नहीं हुई है। प्रकृति पर्यटन खास तौर पर बंद-ए-अमीर, बामियान और वाख़ान से जुड़ा है, लेकिन सड़क, सुरक्षा और स्थानीय अनुमति स्थल के अनुसार बदलती है। सूचना और संस्कृति मंत्रालय ने मार्च 2026 में ईद के दौरान प्राकृतिक और मनोरंजन स्थलों पर लगभग 2.3 million घरेलू और अंतरराष्ट्रीय यात्राओं की जानकारी दी; यह कुल माँग का संकेत है, अलग-अलग स्थलों के आगंतुकों की ऑडिट की गई संख्या नहीं। सूखा, बाढ़, अचानक बाढ़, कटाव, भूस्खलन, हिमस्खलन, बर्फ़ पिघलने और हिमनदीय प्रवाह में बदलाव तथा भूजल में परिवर्तन चरागाह, वन, आर्द्रभूमि और आवासों को नुकसान पहुँचा सकते हैं। आपदा चेतावनी और आपात प्रतिक्रिया अलग सेवाएँ हैं; प्रकृति पर उनके प्रभाव इस विषय का हिस्सा हैं। संरक्षित प्रजातियों की सूची में NEPA द्वारा बताई गई 149 वर्गिकी इकाइयाँ शामिल हैं: 76 स्तनधारी, 57 पक्षी, आठ पौधे, चार सरीसृप, दो मछलियाँ, एक कीट और एक उभयचर। प्राथमिकता वाली प्रजातियों में हिम तेंदुआ, मार्को पोलो अर्गली, मार्कहोर, यूरियल, आइबेक्स, भूरा भालू, एशियाई काला भालू, पैलस बिल्ली, सेकर बाज़ और प्रवासी जलपक्षी शामिल हैं। छठी राष्ट्रीय जैव-विविधता रिपोर्ट में वैश्विक स्तर पर संकटग्रस्त 39 प्रजातियों और आठ संकटग्रस्त उपप्रजातियों की पहचान हुई, लेकिन राष्ट्रीय आबादियों की जानकारी अधूरी या पुरानी है; इन अभिलेखों से देशव्यापी वर्तमान आबादी का आँकड़ा नहीं निकाला जा सकता। अवैध शिकार, संग्रहण और वन्यजीव व्यापार संरक्षण की चिंताएँ हैं; लागू कानून और स्थल के नियमों के अनुसार मौजूदा प्रवर्तन तथा सामान्य शिकार प्रतिबंध की पुष्टि आवश्यक है। पर्यावरण शिक्षा में प्रांतीय संपर्क कार्यक्रम, स्कूल कार्यक्रम और समुदाय सामग्री शामिल हैं, लेकिन देशव्यापी प्रकृति पाठ्यक्रम, मान्यता प्राप्त पार्क-गाइड प्रशिक्षण मार्ग और आम जनता के लिए शोध तक सामान्य पहुँच व्यवस्था सत्यापित नहीं हुई है। इसलिए प्रकृति प्रबंधन में राष्ट्रीय नियमन और स्थानीय व्यवहार दोनों शामिल हैं; बारी-बारी से चराई या पुनर्स्थापन जैसे संरक्षण उपाय उपयोगकर्ताओं के लिए अल्पकालिक पाबंदियाँ, निगरानी का काम और अवसर लागत पैदा कर सकते हैं।
अफ़ग़ानिस्तान में प्रकृति
अफ़ग़ानिस्तान में प्राकृतिक भू-दृश्य विविध हैं। पहाड़ और रेगिस्तान बड़े भूभाग में फैले हैं। चरागाह पशुओं के लिए चारा देते हैं और मिट्टी तथा पानी की रक्षा करते हैं। संरक्षित क्षेत्र और वन्यजीव संरक्षण मौजूद हैं, लेकिन पहुँच और सीमाएँ अलग-अलग हैं।
सुझाव
अफ़ग़ानिस्तान में प्रकृति से जुड़े फैसले किसी देशव्यापी अनुमति या शुल्क व्यवस्था पर निर्भर करने के बजाय स्थल के अनुसार लें। घूमने जाने, चराई, संग्रहण, आवास पुनर्स्थापन या संरक्षण परियोजना शुरू करने से पहले NEPA, प्रांतीय कार्यालय या जिम्मेदार स्थानीय निकाय से स्थल की कानूनी स्थिति, सीमा, पहुँच, सुरक्षा और स्थानीय अनुमति की पुष्टि करें। ऐसे उपाय चुनें जो पानी, मिट्टी और आवास की रक्षा करें, और साथ ही चराई तथा अन्य प्रथागत उपयोग पर उनके अल्पकालिक असर को भी ध्यान में रखें।

