हिंदीमे परिवारकेँ अक्सर परिवार (parivaar) कहल जाइत अछि; देशक दोसर बहुत रास भाषामे अलग शब्द अछि। परिवारसँ एकटा घर वा जन्म, विवाह, दत्तक लेब अथवा दीर्घकालीन देखभालसँ जुड़ल संबंधीक बहुत पैघ मंडली बुझायल जा सकैत अछि। संयुक्त परिवारमे सामान्यतः एकसँ बेसी पीढ़ीक संबंधी एक संग रहैत छथि वा पैसा, काज, देखभाल आ निर्णय निकट रूपसँ साझा करैत छथि। एकल परिवार सामान्यतः माता-पिता वा देखभाल करय वाला आ हुनकर संतान पर केंद्रित होइत अछि, हालांकि विस्तारित संबंधी संग निकट संबंध जारी रहि सकैत अछि। भारतक घरमे एकल-अभिभावक परिवार, मिश्रित परिवार, बिना संतानक दंपति, अकेले रहय वाला लोक आ बच्चा वा बुजुर्गक देखभाल करय वाला संबंधी सेहो होइत छथि। पढ़ाइ आ काज लेल प्रवासनक कारण किछु परिवार अलग-अलग शहर वा देशमे रहितो निकट रूपसँ जुड़ल रहैत छथि। परिवारक सदस्य बाल-देखभाल, बुजुर्गक देखभाल, घरेलू काज, आमदनी, संपत्तिक जिम्मेदारी आ बीमारी वा बेरोजगारीक समय सहायता साझा कऽ सकैत छथि। ई नेटवर्क सुरक्षा, जानकारी, संपर्क आ अपनत्वक मजबूत भावना दऽ सकैत अछि। उम्र आ परिवारमे स्थान निर्णयकेँ प्रभावित कऽ सकैत अछि, आ शिक्षा, काज, विवाह, आवास वा समारोह पर बुजुर्गसँ सलाह लेल जा सकैत अछि। मुदा प्रत्येक घरमे अधिकारक व्यवस्था अलग होइत अछि; नव वयस्क स्वतंत्र निर्णय लऽ सकैत छथि वा संबंधीसँ बातचीत कऽ सकैत छथि। नातेदारीक बहुत रास खास शब्द अछि। मातृ आ पितृ पक्षक संबंधी, पैघ आ छोट भाई-बहिन, आ सासुरक अलग-अलग संबंधक स्थानीय भाषामे अलग नाम आ अपेक्षा भऽ सकैत अछि। पारिवारिक उत्सव आ जिम्मेदारी धर्म, क्षेत्र, जाति, भाषा आ घरक अनुसार बदलैत अछि। जन्म, विवाह, त्योहार, मृत्यु आ भेंटक अवसर पर संबंधी जुटि सकैत छथि, मुदा सभ पर लागू होय एहन एक्के भारतीय पारिवारिक रीति नहि अछि। परिवारक निकटता दुर्व्यवहार, जबरदस्ती निर्णय, वित्तीय नियंत्रण वा निजता छीनबाक औचित्य नहि दैत अछि। स्वस्थ परिवार जिम्मेदारी पर बात कऽ सकैत अछि, देखभाल उचित रूपसँ बाँटि सकैत अछि, सहमतिक आदर कऽ सकैत अछि आ सदस्यकेँ बाहरी सहायता लेबाक अवसर दऽ सकैत अछि।
भारतमे परिवार
भारतमे परिवारमे माता-पिता, संतान, दादा-दादी, भाई-बहिन, सासुरक लोक आ दूर-दूर धरि पसारल संबंधी शामिल भऽ सकैत छथि। किछु घर संयुक्त वा बहु-पीढ़ी वाला होइत अछि, जखनकि आन एकल परिवार, एकल-अभिभावक, मिश्रित वा आन रूपमे होइत अछि। परिवार मजबूत सहायता दऽ सकैत अछि, मुदा जिम्मेदारी आ निर्णय लेबाक तरीका घर-घरमे बहुत अलग होइत अछि।
Tip
धारणा बनेबाक पहिले जानू जे घरमे के रहैत छथि आ महत्वपूर्ण निर्णयमे के भाग लैत छथि। पैसा, देखभाल, भेंट आ आपातकालीन जिम्मेदारी पर खुलि कऽ बात करू। एकटा सरल साझा योजना स्नेहकेँ अस्पष्ट दायित्व बनय सँ रोकि सकैत अछि।

