सेमलिकी और इशांगो क्षेत्र से मिले पुरातात्त्विक साक्ष्यों में मध्य और उत्तर पुरापाषाण काल के अवशेष, मछली पकड़ने और शिकार के औज़ार तथा इशांगो की हड्डी शामिल हैं, जिसे सामान्यतः वर्तमान से लगभग 25,000 से 16,000 वर्ष पहले का माना जाता है। ये खोजें दीर्घकालीन बसावट दिखाती हैं, लेकिन किसी एक समान मूल आबादी की धारणा का समर्थन नहीं करतीं। बाद में बंटू-भाषी लोगों के विस्तार, कृषि, धातुकर्म, मछली पकड़ने और व्यापार ने वन तथा सवाना क्षेत्रों में विविध गाँव, कुल, मुखियातंत्र और राज्य बनाए। लुबा, लुंडा और कुबा की राजनीतिक परंपराएँ अलग-अलग इलाकों में विकसित हुईं, जबकि लगभग चौदहवीं शताब्दी से स्थापित कोंगो राज्य वर्तमान अंगोला और पश्चिमी कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य के हिस्सों तक फैला था। उसका केंद्र म्बांज़ा कोंगो अब अंगोला में है, इसलिए आधुनिक प्रांतीय सीमाएँ पुराने इतिहास पर लागू नहीं की जा सकतीं। सोलहवीं से उन्नीसवीं शताब्दी तक व्यापार, कूटनीति, ईसाई धर्म, दासता, हाथीदाँत और रबर ने स्थानीय समाजों को अटलांटिक, मध्य अफ्रीकी, पूर्वी अफ्रीकी और स्वाहिली-अरबी नेटवर्कों से जोड़ा। उन्नीसवीं शताब्दी में कारवाँ व्यापार और चोक्वे, लुंडा तथा लुबा से जुड़े शक्ति नेटवर्कों के विस्तार ने कई क्षेत्रों के राजनीतिक और आर्थिक संबंध बदल दिए। 1884–1885 का बर्लिन सम्मेलन 1885 से 1908 तक लियोपोल्ड द्वितीय के अधीन कांगो मुक्त राज्य से पहले हुआ। जबरन श्रम, रबर और हाथीदाँत के कोटे, बंधक बनाना और हिंसा दोहन को सहारा देते थे, जबकि फोर्स पब्लिक औपनिवेशिक माँगें लागू करती थी। बेल्जियम ने 1908 में इस क्षेत्र को अपने अधीन कर बेल्जियन कांगो के रूप में प्रशासित किया। मिशनरी शिक्षा, नस्ली नियम, मज़दूरी, बागान, खनन और मुख्यतः दोहन के लिए बनाई गई आधारभूत संरचना का विस्तार हुआ। कटांगा में तांबे का उत्पादन 1906 में स्थापित यूनियन मिनिएर दु ओ-कटांगा से जुड़ा था। औपनिवेशिक शासन के अंतिम दौर में शहरीकरण, चर्च और स्कूल की शिक्षा, मज़दूरी, ट्रेड यूनियन और कांगोली राजनीतिक आंदोलन बढ़े, लेकिन शिक्षा और प्रशासन तक पहुँच बहुत असमान रही। 30 जून 1960 को जोज़ेफ कासा-वुबू राष्ट्रपति और पैट्रिस लुमुम्बा प्रधानमंत्री बने और देश स्वतंत्र हुआ। 5 जुलाई को फोर्स पब्लिक की बगावत, बेल्जियम का हस्तक्षेप, कटांगा और दक्षिण कसाई के अलगाव तथा संयुक्त राष्ट्र अभियान ONUC ने स्वतंत्रता को व्यापक राजनीतिक और सैन्य संकट में बदल दिया। 17 जनवरी 1961 को लुमुम्बा की हत्या हुई। संकट में स्थानीय राजनीतिक हित और बेल्जियम, अमेरिका तथा सोवियत संघ के अंतरराष्ट्रीय संबंध शामिल थे; इसलिए शीत युद्ध की कोई एक व्याख्या सभी कारणों को नहीं समझा सकती। जोज़ेफ-देज़िरे मोबुतू ने 1965 में सत्ता हथियाई और 1971 में देश का नाम ज़ैरे रखा। उनकी एक-दलीय व्यवस्था में ऑथेंटिसिते की नीति, राष्ट्रीयकरण, संरक्षण-आधारित राजनीति और दमन के साथ बढ़ते आर्थिक तथा ऋण संकट शामिल थे। 1996–1997 के प्रथम कांगो युद्ध के बाद लॉराँ-देज़िरे काबिला सत्ता में आए और कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य नाम फिर प्रचलित हुआ। 1998 से 2003 तक चले दूसरे कांगो युद्ध में पड़ोसी देश, RCD, MLC और अन्य सशस्त्र समूह शामिल थे। लुसाका प्रक्रिया, अंतर-कांगो वार्ता, 2002–2003 का प्रिटोरिया समझौता और MONUC ने उस संक्रमण को सहारा दिया जिससे 2006 के बहुदलीय चुनाव हुए। 2010 में MONUC का नाम MONUSCO हुआ और 2013 में संयुक्त राष्ट्र हस्तक्षेप ब्रिगेड बनाई गई। 2018 में चुनाव हुए और 2019 में फ़ेलिक्स त्शिसेकेदी ने पद संभाला। समकालीन इतिहास आज भी क्षेत्र के अनुसार अलग है। उत्तर किवु, दक्षिण किवु और इतुरी में सशस्त्र संघर्ष जारी है, जहाँ भूमि, अधिकार, नागरिकता, सुरक्षा और पहचान के स्थानीय विवाद क्षेत्रीय हस्तक्षेप तथा संसाधन-आधारित अर्थव्यवस्थाओं से जुड़ते हैं। 2021 से M23 फिर एक प्रमुख पक्ष रहा है; 21 फरवरी 2025 को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने उत्तर और दक्षिण किवु में M23 के हमलों की निंदा की और बाहरी समर्थन समाप्त करने की माँग की। औपनिवेशिक हिंसा, दास व्यापार, स्वतंत्रता, लुमुम्बा, मोबुतू, युद्धों, नरसंहारों और विस्थापन की यादें राष्ट्रीय, क्षेत्रीय, चर्च, प्रवासी और अंतरराष्ट्रीय समुदायों में अलग-अलग हैं। विश्वविद्यालय, अभिलेखागार, संग्रहालय, स्कूल, चर्च, विरासत संस्थाएँ और स्थानीय शोधकर्ता अलग-अलग साक्ष्य सुरक्षित रखते हैं। संस्थानों और संग्रहों के अनुसार पहुँच, भाषा, शोध-अनुमति, समय और लागत अलग-अलग होती हैं। मौखिक इतिहास के काम में स्रोतों की आलोचनात्मक जाँच, संवेदनशील गवाही की सुरक्षा और सूचित सहमति आवश्यक है।
कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य में इतिहास
कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य का इतिहास आरंभिक मानव बसावट, विविध पूर्व-औपनिवेशिक समाजों, औपनिवेशिक दोहन, स्वतंत्रता, तानाशाही, युद्धों और जारी संघर्षों तक फैला है। पुरातत्त्व, स्थानीय भाषाएँ, मौखिक इतिहास, लिखित अभिलेख और बाहरी रिपोर्टें इस विकास के अलग-अलग पहलुओं को उजागर करती हैं। क्षेत्रीय भिन्नताएँ महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि कांगो बेसिन, कसाई, कटांगा, किवु, इतुरी और पश्चिमी कांगो के ऐतिहासिक रास्ते अलग-अलग रहे।
सुझाव
कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य के इतिहास पर काम करते समय पहले अवधि, क्षेत्र और मुख्य प्रश्न सीमित करें। किसी विवरण का आकलन केवल एक स्रोत या वर्तमान रिपोर्ट के आधार पर न करें; इसके बजाय उपयुक्त स्रोत-प्रकारों की तुलना करें। हर बार स्पष्ट करें कि किसी नाम का संदर्भ पूर्व-औपनिवेशिक राज्य, औपनिवेशिक क्षेत्र, ज़ैरे या वर्तमान प्रांत से है।

